Notice
जनकृति का नवीन अंक [अप्रैल-मई सयुंक्त अंक 2018] आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है. सम्पूर्ण अंक की पीडीऍफ़ डाउनलोड करने हेतु विषय सूची में दिए लिंक पर जाएँ.

 विषय सूची/Index

जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका                       ISSN 2454-2725, Impcat Factor: 2.0202 [GIF]

 Jankriti International Magazine                        www.jankritipatrika.in

Vol.4, issue 36-37, April-may 2018.    वर्ष 4, अंक 36-37, अप्रैल-मई 2018

 

सम्पूर्ण अंक की  पीडीऍफ़ प्राप्त करने हेतु लिंक पर क्लिक करेंअप्रैल-मई 2018 

 

साहित्यिक विमर्श/ Literature Discourse

कविता                                  [9-15]    

आकांक्षा मिश्रा, अंजू जिंदल, ज्योत्सना जोशी, गुलाम गौश अंसारी, जयति जैन, नीरज द्विवेदी, गजेन्द्र पाटीदार

ग़ज़ल                                       [16]

  • अमरेश गौतम 'अयुज'

कहानी                                  [17-24]

  • अधूरी कसमें: मालती मिश्रा

लघुकथा                               [25-27]

  • आशियानां: विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'
  • औरंगजेब: मृणाल आशुतोष
  • जहरीली गालियाँ: प्रदीप कुमार

पुस्तक  समीक्षा                     [28-33]

  • आत्‍माएँ बोल सकती हैं [लेखक- डॉ. ललित सिंह] समीक्षक: डेल्‍सी एलिजाबेथ
  • कंदील (उपन्यास: राजकुमार राकेश) समीक्षक- अंकित
  • शंख घोष की चयनित कविताएँ (शंख घोष) समीक्षक- जयश्री पुरवार

व्यंग्य                                   [34-36]

  • बेइज़्ज़ती सर्वत्र अर्जयेत: अमित शर्मा
  • इलेक्ट्रानिक के महान किरदार: संजय वर्मा ’दृष्टि’

यात्रा वृत्तांत                         [37-41]             

  • नेपाल यात्रा: गौरव कुमार

क्षणिका                                 [42]

  • क्षणिकाएं: डॉ. जियाउर रहमान जाफरी

साहित्यिक लेख                   [43-45]

  • सूर्यबाला जी की व्यंग्य रचना ‘जूते चिढ़ गए हैं’- डॉ संगीता गांधी

रोशनदान                              [46-49]

  • आम नहीं है ....आम की यह बरसात: डॉ निशा शर्मा

 

मीडिया- विमर्श/ Media Discourse

  • सोशल मीडिया और छात्र आंदोलन; एक अध्ययन- मनीष कुमार जैसल [शोध आलेख] [50-55]
  • स्वतंत्रतापूर्व पत्रकारिता में राष्ट्रवाद के विविध स्वर: डॉ. नवाब सिंह [शोध आलेख] [56-72]
  • Comparative analysis between Hindi and English print media representation of Bhopal gas tragedy: Armendra Amar [Research Article] [73-91]
  • सोशल मीडिया और छात्र आंदोलन; एक अध्ययन: मनीष कुमार जैसल [शोध आलेख] [92-102]

 

कला- विमर्श/ Art Discourse

  • हिंदी सिनेमा और सामाजिक सद्भाव: शालिनी सिंह [शोध आलेख] [103-106]
  • गोंड संस्कृति में प्राचीन ओजा हस्त कला का योगदान (तेलंगागा राज्य के आदिलाबाद जिले के संदर्भ में): चोले नंद कुमार [आलेख] [107-111]
  • साहित्य से सिनेमा माध्यम में रूपांतरण की चुनौतियाँ: ज्ञान चंद्र पाल [शोध आलेख] [112-119]

 

दलित एवं आदिवासी- विमर्श/ Dalit and Tribal Discourse

  • हिंदी साहित्य और संवेदना के विकास में हिंदी दलित लेखन की भूमिका: विकास कुमार [शोध आलेख] [120-125]
  • नयी सदी की हिंदी कहानियों में आदिवासी जीवन यथार्थ: डॉ. नवीन नन्दवाना [शोध आलेख] [126-133]
  • दलित चेतना के विकास में अम्बेडकर की भूमिका: अरविन्द प्रसाद गोंड [शोध आलेख] [134-137]
  • आदिवासी समाज : विकास, विस्थापन और अस्तित्त्व- आनन्द कुमार पटेल [शोध आलेख] [138-145]
  • हाशिये की वैचारिकी : भोगा हुआ यथार्थ: डॉ.धीरेन्द्र सिंह [शोध आलेख] [146-151]

 

स्त्री- विमर्श/ Feminist Discourse

  • भारत की आधी आबादी का सच: अमित पांडेय [शोध आलेख] [152-159]
  • आंकडा संकलन की एक तकनीक-मौखिक इतिहास(नारीवादी शोध के संदर्भ में): राज कुमार [शोध आलेख] [160-162]
  • स्त्री शोषण का त्रासद आख्यान : ‘माधवी’-रविन्द्र कुमार मीना [शोध आलेख] [163-169]

 

बाल- विमर्श/ Child Discourse

  • 21वीं सदी में बाल साहित्य का योगदान: डॉ. कुमारी उर्वशी [शोध आलेख] [170-172]

 

भाषिक- विमर्श/ Language Discourse

  • बघेली का क्षेत्र एवं विभिन्न रूप: दिब्य शंकर मिश्र, डॉ. पीयूष प्रताप सिंह  [शोध आलेख] [173-176]
  • सूचना क्रांति के युग में खड़िया ग्राम में भाषा परिवर्तन: सलमा केरकेट्टा [शोध आलेख] [177-184]

 

शिक्षा- विमर्श/ Education Discourse

  • ‘शारीरिक एवं नैतिक शिक्षा के नये प्रतिमान’ : एक अनुशीलन: डॉ. अजय कुमार यादव [शोध आलेख] [185-190]
  • हिंदी में उपलब्‍ध वि‍ज्ञान और तकनीकी साहि‍त्‍य और पाठ्यक्रम: राहुल खटे [शोध आलेख] [191-197]

 

समसामयिक विषय/ Current Affairs

  • दुराचार का असली जिम्मेदार पुरुष समाज: शालिनी श्रीवास्तव [लेख] [198-199]
  • राष्ट्रवाद मेरी नज़र में: जालाराम चौधरी [लेख] [200-201]

 

शोध आलेख/ Research Article

  • मध्यकालीन गुर्जर हिंदी जैन-कवि आनंदघन की दार्शनिकता: डॉ. सोमाभाई पटेल [202-207]
  • 21वीं सदी की कहानियों में किन्नर विमर्श: डॉ. सचिन गपाट [208-211]
  • NUCLEAR POWER GENERATION IN JAPAN AFTER TRIPLE DISASTER: Vikash Yadav [212- 219]
  • छायावादी काव्य में प्रेम और सौन्दर्य की प्रतिष्ठा: डॉ.रामचन्द्र पाण्डेय [220-226]
  • अस्मितामूलक साहित्य में नई अध्ययन प्रणालियाँ: कविता पासवान [227-231]
  • ‘गुलाम मंडी’ : एक आलोचनात्मक अध्ययन- वीनू [232- 238]
  • निर्मल का एकांत: पायल [239-242]
  • सामाजिक – राजनीतिक विद्रूपताओं  का अंत:साक्ष्य ‘मुआवज़े’: श्वेता रस्तोगी [243-248]
  • लोक काव्य में लोक संस्कृति के विविध रूप: पूनम कुमारी [249-254]
  • राष्ट्रीयता के जनक एवं युग प्रवर्तक स्वामी विवेकानन्द: दिनेश कुमार [255-262]
  • हिंदी दलित साहित्य का विकास और ‘हंस’ की भूमिका- प्रिया कौशिक [263-273]
  • हिंदी साहित्य में मिथक की अवधारणा: राहुल प्रसाद [274-279]

 

अनुवाद/ Translation

  • अनुवाद और हिंदी साहित्य- रणजीत कुमार सिन्हा [280-282]
  • गुजराती लघुकथा ‘स्वपन्वत’ [लेखक- कनु सुणावकर] का हिंदी: अनुवादक- डॉ. रजनीकांत एस. शाह [283-284]

 

पूर्व अंक की  पीडीऍफ़ प्राप्त करने हेतु लिंक पर क्लिक करें- जनकृति फरवरी-मार्च सयुंक्त अंक 2018 

[जनकृति का आगामी अंक [जून 2018] जून के दूसरे सप्ताह में प्रकाशित किया जाएगा. लेखकों से आग्रह है कि कृपया पत्रिका के नियमों के आधार पर ही अपनी रचनाएँ, लेख, शोध आलेख इत्यादि भेजें. इसके अतिरिक्त पत्रिका हेतु प्राप्त होने वाली सभी लेखों को प्लेगारिस्म सोफ्टवेयर से जांचा जाता है यदि इसके पश्चात भी प्रकाशित आलेखों में प्लेगारिस्म संबंधी शिकायत आती है और जांच के उपरान्त आरोप सही पाया जाता है तो जिस लेख को लेकर शिकायत हमें मिलती है उसे सार्वजनिक किया जाएगा इसलिए किसी लेखक की कृति का प्रयोग करने पर उसकी जानकारी लेख में अवश्य दें]  






Total 562 Articles Posted.

INDEXING

परिचय

जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका, जनकृति (साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था) द्वारा प्रकाशित की जाने वाली बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय मासिक पत्रिका है. पत्रिका मार्च 2015 से प्रारंभ हुई, जिसका उद्देश्य सृजन के प्रत्येक क्षेत्र में विमर्श के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विषयों को पाठकों के समक्ष रखना है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पत्रिका में साहित्य, कला, मीडिया, शोध, शिक्षा, दलित एवं आदिवासी, समसामायिक विमर्श स्तंभ रखे गए हैं साथ ही अनुवाद, साक्षात्कार, प्रवासी साहित्य जैसे महत्वपूर्ण स्तंभ भी पत्रिका में शामिल किए गए हैं. पत्रिका का एक उद्देश्य सृजन क्षेत्र के हस्ताक्षरों समेत नव लेखकों को प्रमुख रूप से मंच देना है. पत्रिका में शोधार्थी, शिक्षक हेतु शोध आलेख का स्तंभ भी है, जिसमें शोध आलेख प्रकाशित किए जाते हैं. पत्रिका वर्त्तमान में यूजीसी द्वारा जारी सूची के साथ-साथ विश्व की 9 से अधिक रिसर्च इंडेक्स में शामिल है. शोध आलेखों की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए विषय विशेषज्ञों द्वारा शोध आलेख का चयन किया जाता है. पत्रिका समाज एवं सृजनकर्मियों के मध्य एक वैचारिक वातावरण तैयार करना चाहती है, जो आप सभी के सहयोग से ही संभव है अतः पत्रिका में प्रकाशित सामग्रियों पर आपके विचार सदैव आमंत्रित हैं.

-कुमार गौरव मिश्रा (संस्थापक एवं प्रधान संपादक)