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जनकृति का नवीन अंक [21वीं सदी विशेषांक] आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है. अंक की पीडीऍफ़ कॉपी आप विषय सूची के ऊपर दिए लिंक से प्राप्त कर सकते हैं.

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जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका                       ISSN 2454-2725, Impcat Factor: 2.0202 [GIF]

 Jankriti International Magazine                        www.jankritipatrika.in

Vol.4, issue 38, June 2018.    वर्ष 4, अंक 38, जून 2018

[21वीं सदी विशेषांक]

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इक्कीसवीं सदी में आदिवासी अस्मिता के प्रश्न: डॉ.विजय कुमार प्रधान                                          5-8

इक्कीसवीं सदी की हिन्दी ग़ज़ल और स्त्री विमर्श: पूनम देवी                                                    9-15

इक्कीसवीं सदी की पहले दशक की कहानियाँ और मुस्लिम जीवन: ज्योतिष कुमार यादव                     16-19

21वी सदी और सुशीला टाकभौरे की कविताएं: प्रो. डॉ. सौ. रमा प्र. नवले                                    20-27

21वीं सदी की कहानियों में किन्नर विमर्श: डॉ. सचिन गपाट                                                      28-31

21वीं सदी में अनुवाद की सामाजिक सन्दर्भ: रक्षा कुमारी झा                                                     32-36

21 वीं सदी में बाल साहित्य का योगदान: डॉ. कुमारी उर्वशी                                                      37- 41

21 वीं सदी में बहुसंख्यक समाज का सामाजिक यथार्थ: डॉ. बलवीर सिंह ‘राना’                            42- 47

21वीं सदी और स्त्री केन्द्रित हिंदी सिनेमा: डॉ. रेखा कुर्रे                                                 48- 54

21वीं सदी का साहित्य: वाद-विवाद : भोला नाथ सिंह                                                  55- 56

इक्कीसवीं सदी में सतगुरु रविदास की प्रासंगिकता: सोनिया                                                       57- 60

21वीं सदी और स्त्री: डॉ. रेणुका व्यास ‘नीलम’                                                                       61- 63

21वीं  सदी की कवयित्रियों के काव्य में स्त्री विमर्श: हरकीरत हीर                                               64- 73

हिंदी दलित आत्मकथाओं में अभिव्यक्त समकालीन प्रश्न: बृज किशोर वशिष्ट                                74- 81

21 वी शताब्दी में हिंदी साहित्य शिक्षण: मनीष खारी                                                                82- 87

21वीं सदी के कहानी साहित्य में चित्रित नारी विमर्श: प्रो. डॉ. सौ. सुरैया इसुफ़अल्ली शेख               88- 90

21वीं सदी की हिंदी कविता: डॉ. दीना नाथ मौर्या                                                                    91- 95

21वीं सदी की बड़ी और विकराल समस्या: अनीता देवी                                                           96- 99

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[जनकृति का आगामी अंक [जुलाई 2018] जुलाई के अंतिम सप्ताह में प्रकाशित किया जाएगा. लेखकों से आग्रह है कि कृपया पत्रिका के नियमों के आधार पर ही अपनी रचनाएँ, लेख, शोध आलेख इत्यादि भेजें. इसके अतिरिक्त पत्रिका हेतु प्राप्त होने वाली सभी लेखों को प्लेगारिस्म सोफ्टवेयर से जांचा जाता है यदि इसके पश्चात भी प्रकाशित आलेखों में प्लेगारिस्म संबंधी शिकायत आती है और जांच के उपरान्त आरोप सही पाया जाता है तो जिस लेख को लेकर शिकायत हमें मिलती है उसे सार्वजनिक किया जाएगा इसलिए किसी लेखक की कृति का प्रयोग करने पर उसकी जानकारी लेख में अवश्य दें]  






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परिचय

जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका, जनकृति (साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था) द्वारा प्रकाशित की जाने वाली बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय मासिक पत्रिका है. पत्रिका मार्च 2015 से प्रारंभ हुई, जिसका उद्देश्य सृजन के प्रत्येक क्षेत्र में विमर्श के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विषयों को पाठकों के समक्ष रखना है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पत्रिका में साहित्य, कला, मीडिया, शोध, शिक्षा, दलित एवं आदिवासी, समसामायिक विमर्श स्तंभ रखे गए हैं साथ ही अनुवाद, साक्षात्कार, प्रवासी साहित्य जैसे महत्वपूर्ण स्तंभ भी पत्रिका में शामिल किए गए हैं. पत्रिका का एक उद्देश्य सृजन क्षेत्र के हस्ताक्षरों समेत नव लेखकों को प्रमुख रूप से मंच देना है. पत्रिका में शोधार्थी, शिक्षक हेतु शोध आलेख का स्तंभ भी है, जिसमें शोध आलेख प्रकाशित किए जाते हैं. पत्रिका वर्त्तमान में यूजीसी द्वारा जारी सूची के साथ-साथ विश्व की 9 से अधिक रिसर्च इंडेक्स में शामिल है. शोध आलेखों की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए विषय विशेषज्ञों द्वारा शोध आलेख का चयन किया जाता है. पत्रिका समाज एवं सृजनकर्मियों के मध्य एक वैचारिक वातावरण तैयार करना चाहती है, जो आप सभी के सहयोग से ही संभव है अतः पत्रिका में प्रकाशित सामग्रियों पर आपके विचार सदैव आमंत्रित हैं.

-कुमार गौरव मिश्रा (संस्थापक एवं प्रधान संपादक)