Notice
जनकृति का जुलाई, अगस्त एवं सितंबर अंक आप सभी पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है। अंक की पीडीएफ प्राप्त करने हेतु दिये गए लिंक को कॉपी करके url वाली जगह पर डालें। धन्यवाद अक्टूबर अंक भी शीघ्र प्रकाशित होगा

जनकृति के नवीन अंक प्रकाशित- वर्ष 2018

जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका                       ISSN 2454-2725, Impcat Factor: 2.0202 [GIF]

 Jankriti International Magazine                        www.jankritipatrika.in

                                           [अंक की पीडीएफ हेतु नीचे लिंक को कॉपी करके और url वाली जगह डालें ]

वर्ष 4, अंक 34-35, फरवरी-मार्च  2018 (सयुंक्त अंक) -http://tiny.cc/wm8w0y

वर्ष 4, अंक 36-37, अप्रैल-मई  2018 (सयुंक्त अंक) - http://tiny.cc/bl8w0y

वर्ष 4, अंक 38, जून  2018 - http://tiny.cc/yi8w0y  [21वीं सदी विशेषांक]

वर्ष 4, अंक 39, जुलाई  2018 - http:/tiny.cc/407w0y

वर्ष 4, अंक 40, अगस्त  2018 -  https:/tinyurl.com/y7g46jmh

वर्ष 4, अंक 41, सितंबर  2018 - http:/tiny.cc/z83w0y  [साक्षात्कार विशेषांक]

 

[अक्टूबर एवं नवंबर अंक भी शीघ्र अपलोड किए जाएँगे। आमंत्रित- शोध आलेख, साहित्यिक विधाओं में रचनाएँ इत्यादि jankritipatrika@gmail,com ]

 

 






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परिचय

जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका, जनकृति (साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था) द्वारा प्रकाशित की जाने वाली बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय मासिक पत्रिका है. पत्रिका मार्च 2015 से प्रारंभ हुई, जिसका उद्देश्य सृजन के प्रत्येक क्षेत्र में विमर्श के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विषयों को पाठकों के समक्ष रखना है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पत्रिका में साहित्य, कला, मीडिया, शोध, शिक्षा, दलित एवं आदिवासी, समसामायिक विमर्श स्तंभ रखे गए हैं साथ ही अनुवाद, साक्षात्कार, प्रवासी साहित्य जैसे महत्वपूर्ण स्तंभ भी पत्रिका में शामिल किए गए हैं. पत्रिका का एक उद्देश्य सृजन क्षेत्र के हस्ताक्षरों समेत नव लेखकों को प्रमुख रूप से मंच देना है. पत्रिका में शोधार्थी, शिक्षक हेतु शोध आलेख का स्तंभ भी है, जिसमें शोध आलेख प्रकाशित किए जाते हैं. पत्रिका वर्त्तमान में यूजीसी द्वारा जारी सूची के साथ-साथ विश्व की 9 से अधिक रिसर्च इंडेक्स में शामिल है. शोध आलेखों की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए विषय विशेषज्ञों द्वारा शोध आलेख का चयन किया जाता है. पत्रिका समाज एवं सृजनकर्मियों के मध्य एक वैचारिक वातावरण तैयार करना चाहती है, जो आप सभी के सहयोग से ही संभव है अतः पत्रिका में प्रकाशित सामग्रियों पर आपके विचार सदैव आमंत्रित हैं.

-कुमार गौरव मिश्रा (संस्थापक एवं प्रधान संपादक)