Notice
जनकृति का मई-जून 2017 सयुंक्त अंक आप सभी पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है. अंक में प्रकाशित सामग्री आप विषय सूची के आधार पर बायीं ओर स्तम्भ में पढ़ सकते हैं.

शोध आलेख भेजने हेतु नियम एवं शोध आलेख प्रारूप

 

जनकृति में साहित्य किसी भी विधा में रचनाएँ साथ ही साहित्य, कला, समाज, राजनीति, विज्ञान इत्यादि से संबंधित विषयों पर लेख भेज सकते हैं. पत्रिका में शोध आलेख भी स्वीकृत किये जाते हैं- शोध आलेख हेतु नियम नीचे दिए गए हैं इन नियमों के आधार पर भेजे गए  शोध आलेख स्वीकृत किये जाएंगे।

 

शोध आलेख प्रारूप

शोध आलेख निम्नलिखित बिन्दुओं के अनुसार लिखित हो-

  1. शोधपत्र का शीर्षक।
  2. लेखक/लेखकों का नाम उनके ईमेल संकेत के साथ (लेखक/लेखकों का परिचय उनके नाम/नामों में सिम्बल लगाकर, नीचे फुटनोट् में प्रस्तुत किया जाना चाहिए)।
  3. सार-संक्षेप।
  4. की-वर्ड्स (शोधपत्र के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण शब्द जो आन-लाइन-सर्च में सहायक हों)।
  5. शोधपत्र (हेडिंग्-सहित या हेडिंग्-रहित)।
  6. उपसंहार / निष्कर्ष
  7. सन्दर्भ-ग्रन्थ-सूची

 

  • प्रकाशित ग्रंथों के लिए

सिंह, डॉ. शिवप्रसाद, ‘विद्यापति’, संस्करण, वर्ष 2011 लोकभारती प्रकाशन, इलाहबाद,

 

  • पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों के लिए

कुमार, राकेश, ‘नारीवादी आंदोलन और भारतीय कथा साहित्य’, वर्ष 2, अंक 25, जनवरी 2012, पृष्ठ संख्या, हिंदी संस्थान दिल्ली

 

शोध आलेख प्रारूप उदाहरण-

हिंदी- हिंदी शोध आलेख प्रारूप उदाहरण

अंग्रेजी- अंग्रेजी में शोध आलेख प्रारूप उदाहरण

 

शोध आलेख हेतु नियम

  1. पत्रिका में शोध आलेख एवं शोध सार प्रत्येक माह के 30 तारीख तक मंगवाए जाएंगे।
  2. प्राप्त शोध आलेखों को शोध प्रारूप एवं कंटेंट के आधार पर सम्पादन मंडल द्वारा जांचा जाएगा।
  3. सम्पादन मंडल द्वारा शोध आलेखों के विषय, शोध आलेख में दिए गए तथ्यों, वर्णन इत्यादि की मौलिकता को Plagiarism के आधार पर जांचा जाएगा कि वह कहीं से कॉपी न हो।
  4. बिंदु 3 की प्रक्रिया के पश्चात शोध आलेख को शोध विषय के अनुरूप दो विषय विशेषज्ञ द्वारा जांचा जाएगा, जिसमें शोध आलेख की स्वीकृति एवं अस्वीकृति तय होगी। सम्पादक मण्डल किसी भी शोध सामग्री को प्रकाशित अथवा अप्रकाशित करने का अधिकार रखता है।
  5. यदि शोध आलेख के पुनर्लेखन की आवश्यकता होगी तो उसे शोधार्थी को वापस भेज दिया जाएगा। शोध आलेख स्वीकार होने की स्थिति में उसे यथासंभव शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।
  6. शोध आलेख एक बार प्रकाशित होने के बाद उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन करने की अनुमति नहीं होगी।
  7. शोध आलेख प्रकाशन हेतु स्वीकृत हो जाने के बाद उसे आन लाइन प्रकाशित किया जाएगा और वह जनकृति की आधिकारिक वेबसाइट पर पीडीऍफ़ एवं ऑनलाइन टेक्स्ट रूप में दिखार्इ देगा।
  8. शोध आलेख प्रकाशित होने के बाद लेखक को र्इमेल से सूचित किया जाएगा और पीडीएफ फाइल में शोध आलेख भेजा जाएगा।
  9. शोध आलेख के साथ मौलिकता का प्रमाण-पत्र हस्ताक्षर के साथ लेखक द्वारा दिया जाना अनिवार्य है।
  10. शोध आलेख में प्रूफ संबंधी, फॉन्ट संबंधी मामलों को जांच कर ही शोध आलेख भेजें।
  11. शोध-पत्रिका में प्रकाशित सभी पत्रों के विचार लेखकों के अपने हैं. इससे संपादन-मंडल का सहमत होना अनिवार्य नहीं है|

 

फॉण्ट -

  • अंग्रेजी-भाषा के लिए ‘टाइम्स न्यू रोमन’- वर्ग के फॉण्ट एवं हिन्दी के लिए ‘यूनिकोड् मंगल, कोकिला,’-वर्ग के फॉण्ट का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • जनकृति में प्रेषित शोधपत्रों के लिए उपर्युक्त को छोड़ किसी अन्य फॉण्ट का प्रयोग न करें।

 

 विशिष्ट प्रस्तुतीकरण- 

  • शोधपत्रों की प्रस्तुति में विशिष्ट साज-सज्जा, आकृतियों, कालम, टेबल्स, वृत्त आदि का प्रयोग न करें।
  • अत्यन्त आवश्यक होने पर ही कालम, टेबल्स, चार्ट्स का प्रयोग करें।
  • शोधपत्र अपरिहार्य रूप से  ‘पी.डी.एफ.-फाइल्’ और एक ‘एम.एस.-वर्ल्ड’ की फाइल् भी भेजी जानी चाहिए।
  • सूचना -
  • शोधपत्र सर्वथा मौलिक, शोध एवं अनुसन्धान के उच्च मानदण्डों पर प्रस्तुत होना चाहिए।
  • आंशिक अथवा पूर्णरूपेण अन्यत्र प्रकाशित, प्रयुक्त शोधपत्र नहीं भेजें।
  • साक्ष्य हेतु प्रस्तुत उद्धरणों को (ग्रन्थ-नाम, पृष्ठ-संख्या, संस्करण, प्रकाशक आदि) बहुत सावधानी-पूर्वक जांच लें और आश्वस्त होने पर ही उनका सन्दर्भ दें।ध्यान दें –

 

    क. सम्पादकों के पहले परामर्श के बाद भी सन्दर्भों के अशुद्ध एवं भ्रान्त होने की दशा में,

   ख. दूसरे परामर्श के बाद भी निर्देशों का पालन किए बग़ैर पुन: भेजे गए, शोधपत्र स्वत: अप्रकाश्य समझे जाएंगे।

 

लेखकों के विचारों, अनुभवों तथा दृष्टिकोण से इस संस्थान, ‘जनकृति’, इसके परामर्श-दातृ-मण्डल तथा सम्पादक-मण्डल का सहमत होना आवश्यक नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 






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परिचय

जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका, जनकृति (साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था) द्वारा प्रकाशित की जाने वाली बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय मासिक पत्रिका है. पत्रिका मार्च 2015 से प्रारंभ हुई, जिसका उद्देश्य सृजन के प्रत्येक क्षेत्र में विमर्श के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विषयों को पाठकों के समक्ष रखना है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पत्रिका में साहित्य, कला, मीडिया, शोध, शिक्षा, दलित एवं आदिवासी, समसामायिक विमर्श स्तंभ रखे गए हैं साथ ही अनुवाद, साक्षात्कार, प्रवासी साहित्य जैसे महत्वपूर्ण स्तंभ भी पत्रिका में शामिल किए गए हैं. पत्रिका का एक उद्देश्य सृजन क्षेत्र के हस्ताक्षरों समेत नव लेखकों को प्रमुख रूप से मंच देना है. पत्रिका में शोधार्थी, शिक्षक हेतु शोध आलेख का स्तंभ भी है, जिसमें शोध आलेख प्रकाशित किए जाते हैं. पत्रिका वर्त्तमान में यूजीसी द्वारा जारी सूची के साथ-साथ विश्व की 9 से अधिक रिसर्च इंडेक्स में शामिल है. शोध आलेखों की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए विषय विशेषज्ञों द्वारा शोध आलेख का चयन किया जाता है. पत्रिका समाज एवं सृजनकर्मियों के मध्य एक वैचारिक वातावरण तैयार करना चाहती है, जो आप सभी के सहयोग से ही संभव है अतः पत्रिका में प्रकाशित सामग्रियों पर आपके विचार सदैव आमंत्रित हैं.

-कुमार गौरव मिश्रा (संस्थापक एवं प्रधान संपादक)