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जनकृति का मई-जून 2017 सयुंक्त अंक आप सभी पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है. अंक में प्रकाशित सामग्री आप विषय सूची के आधार पर बायीं ओर स्तम्भ में पढ़ सकते हैं.

यू. एन. ओ. और हिन्दी: लावण्या दीपक शाह [ उत्तर अमेरिका, ओहायो प्रांत] [लेख]

यू. एन. ओ. और  हिन्दी

लावण्या दीपक शाह

यू. एन. ओ. UNO  संस्था या संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना सन १९४५ की २४ अक्टूबर के दिन हुई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात, विश्व के कुल ५१ राष्ट्रों ने मिलकर, संयुक्त राष्ट्र संघ संस्था का शांति और सद्भाव बढाने के मुख्य उद्देश्य से संगठन किया था।

आप अपने कंप्यूटर के जरिए विश्व के किसी भी भाग से यू. एन. ओ. संस्था की सैर कर सकते हैं।  लिंक देखें

१) http://www.un.org/Pubs/ CyberSchoolBus/

२)http://cyberschoolbus.un.

आज संयुक्त राष्ट्र संघ में अन्य मुल्क भी जुड़े हैं। आज UNO संस्था के  १९५ देश सदस्य बन चुके हैं। यू. एन. ओ. के  १००, ००० कार्यकर्ता, विश्व में शांति स्थापना का  महत्त्वपूर्ण कार्य, कटिबध्धता एवं गंभीरता से निभाते हैं। विश्व के कई मुल्कों मे यू. एन. ओ. के आदेश पर, व संस्था के हस्तक्षेप से, विभिन्न देशों के फ़ौजी दस्ते, पीस कीपिंग या शान्ति स्थापना का  कार्य करते हैं।

विश्व के विभिन्न देशों की भाषाओं में से, अरबी, चीनी, फ्रांसीसी, अंग्रेजी,रशियन और स्पेनिश यू. एन. ओ. संस्था द्वारा स्वीकार की गयीं  भाषाएँ हैं। 

अब हिन्दी भाषा को भी यू. एन. ओ. ने विश्व की एक प्रमुख भाषा मानकर चुनने के मुद्दे पर ध्यान दिया है ।

भौगोलिक स्थान : संयुक्त राष्ट्र संघ संस्था उत्तर अमरीका गणराज्य के पूर्व दिशा में स्थित न्यू योर्क शहर में एक विशाल इमारत में कार्यरत  है।

यू. एन. ओ. संस्था के प्रमुख कार्यकर्त्ता का पद " सेक्रेटरी जनरल " कहलाता है जिन का चुनाव किया जाता है। सेक्रेटरी जनरल राजनैतिक नेता भी हैं, साथ साथ विश्व के हर व्यक्ति के चाहे वे किसी भी देश के नागरिक क्यों न हों , वे , सभी के हितैषी हैं। ख़ास कर गरीब और निचले तबके में जीवन व्यतीत कर रहे लोगों के हक्कों को ध्यान में रखनेवाले विश्व भर के सर्व हितैषी प्रमुख हैं।

विश्व मे मुल्कों के बीच तनाव और लड़ाई के समय, हस्तक्षेप कर, शांति स्थापना करना ये भी यू. एन. ओ. के सेक्रेटरी जनरल का एक महत्त्वपूर्ण कार्य है। वे व्यापारिक संस्थानोँ में जिस प्रकार एक सी. ई. ओ. CIO का पद होता है उसी प्रकार सर्वोच्च प्रमुख की तरह , सेक्रेटरी जनरल UNO संस्था का संचालन करते हैं। 

अब तक ७  सेक्रेटरी जनरल, संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख पद पर कार्य कर चुके हैं। उनके नाम व परिचय इस प्रकार हैं।

 कोफ़ी अन्नान जन्म घाना कार्वावधि १९९७ से -२००६ कुमासी , अफ्रीका के घाना प्रदेश में जन्मे अन्नान, अंग्रेज़ी, फ्रेंच और कई सारी अफ्रीकी भाषाएँ जानते हैं। उन्हें नोबेल इनाम भी दिया गया है।

 बौत्रोस बौत्रोस घाली, ईजिप्त कार्यावधि १९९२ -१९९६ श्रीमान घाली का जन्म कैरो, ईजिप्त में हुआ पेरिस फ्रांस से उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून में पी. एच. डी. की डिग्री ली। वे बहुभाषीय,विद्वान हैं इनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं ।

जविएर पेरेज़ दे केल्लर, पेरु कार्यावधि : १९८२ -१९९१ पेशे से वकील पर बाद में अंतरराष्ट्रीय कानून पर पेरू विश्विद्यालय में अध्यापन कार्य किया।ब्राजील,यूनाईटेडकींग्दम,पोलैंड,वेनेजूएला, सोवियत संघ, बोलीविया , इत्यादी देशों के राजदूत बने।

 कर्ट वाल्धेइम, ऑस्ट्रिया संक्त अनदर -वोर्देर्ण , विएन्ना, ऑस्ट्रिया में जन्म -कार्यावधि : १९७२ -१९८१ फ्रांस के पेरिस, केनेडा, तथा अफ्रीका के नामीबिया प्रांत मे शांति प्रयास के लिए यात्राएं कीं। आस्ट्रिया की सरकार के तहत कीव, लेबनोन, इजराईल, ईजिप्त, जोर्डन, साइप्रस, भी गये। भारत, पाकिस्तान तथा नव निर्मित देश बांग्ला देश के आपसी संबंधों के सुधार के लिए प्रयत्न किए।  अफ्रीका,कारकास, सान्तीआगो, स्टॉकहोम, दक्षिण अमरीका, खाडी मुल्क व यूरोप की यात्राएं  इनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा रहे।

 यु थांत, म्यांमार कार्यावधि : १९६१ -१९७१पन्त्त्नो बर्मा में जन्मे यु थांत हेड मास्टर थे। दूर संचार, शैक्षणिक क्षेत्र राजदूत तथा बर्मा के राजकारण तंत्र से जुड़े और यु. एन. ओ. के सेक्रेटरी जनरल पद पर आसीन हुए जब उनसे पहले पदासीन श्रीमान दाग हम्मरसकजोलद जी का विमान दुर्घटना से  कोंगों में निधन हुआ ।

 दाग हम्मरसकजोलद, स्वीडन कार्यावधि : १९५३ -१९६१ स्वीडन के राष्ट्र प्रमुख के पुत्र उप्प्पासला नामक विश्व विद्यालय वाले शहर में पले बड़े हुए। पी. एच. डी. हासिल की। बेंकिंग के अध्यक्ष पद पर रहे सुएज़ नहर प्रांत के लोगों का सफल यातायात प्रबंधन  इनके कार्यावधि के दौरान हुआ। अफ्रीका के कोंगों प्रदेश की यात्रा के दौरान विमान दुर्घटना से  आकस्मिक निधन हुआ।

 त्र्यग्वे लिए, नोर्वे कार्यावधि : १९४६ -१९५२ ओस्लो , नोर्वे में जन्मे श्रीमान त्र्यग्वे लिए, सन १९४० में विदेश मंत्री पद पर थे।सन १९४५ में नोर्वे के राष्ट्र मंडल के साथ वे अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र संघ की विशाल बैठक में हिस्सा लेने आये उसी वक्त संयुक्त राष्ट्र संघ की रूपरेखा, कानून दस्तावेज तैयार किये गये थे। इटली, इथीओपिया और सोमालिया की राष्ट्र सीमा के पेचीदा मुद्दों का इनके अध्यक्षता के दौरान निपटारा किया गया था।

फिलहाल श्रीमान बान की मून, कोरिया के नागरिक, संयुक्त राष्ट्र संघ के सेक्रेटरी जनरल हैं। श्रीमान बान की मून, कोरिया के नागरिक हैं पर फ्रेंच, कोरीयन और अंग्रेज़ी भाषाओं के अच्छे जानकार हैं। राष्ट्र संघ के वे , आठवें सेक्रेटरी जनरल हैं। उन्होंने १ जनवरी २००७ में ये पद ग्रहण किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, विश्व हिन्दी सम्मलेन, उत्तर अमरीका के न्यूयोर्क शहर मेँ स्थित अन्तर्राष्ट्रीय सँस्था U.N.O. यु.एन.ओ. के तत्त्वाधान में संपन्न हुआ था । उद्घाटन समारोह में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव, बान की मून ने उद्घाटन समारोह दिया। एक दो वाक्य हिंदी भाषा में बोल कर सभा में उपस्थित जन के मन को श्री बाण की मून ने जीत लिया !  उनके यह कहने पर कि,‘ उनके दामाद की मातृभाषा हिंदी है इस व्यक्तव्य ने हिंदी भाषा को यु. एन. ओ. में प्रतिष्ठित करने को कृत संकल्प  हिंदी भाषा के हितैषी समुदाय को अति - प्रसन्न कर दिया।

सं. २००७ जुलाई मेँ, ' अँतराष्ट्रीय हिन्दी दिवस सम्मेलन ' भलीभांति

न्यु -योर्क शहर मेँ सम्पन्न हुआ जो  हिन्दी भाषा के हितैषी समुदाय  का परदेस की भूमि पर हो रहा " महायज्ञ " था।

पिछले इसी तरह के सम्मेलन मेँ हिन्दी की महान कवियत्री आदरणीया श्री महादेवी वर्मा जी ने  समापन भाषण दिया था।

भाषा भारती हिन्दीको युनाइटेड नेशन्स मेँ स्थान मिले ये कई सारे भारतीय मूल के भारतीयोँ की एक महती इच्छा है। ये स्वप्न सत्य हो ये आशा आज बलवती हुई है।इस दिशा मेँ बहुयामी प्रयास यथासँभव जारी हैँ।

न्यु योर्क शहर का जो मुख्य इलाका है उसे मेनहेट्टन कहा जाता है। लिन्क — http://en.wikipedia.

http://en.wikipedia.org/wiki/

इस बृहद प्रदेश न्यु -योर्क के यह  चहेते  नाम हैं , ‘बिग ऐपलया फिर गोथम सीटी " !  भौगोलिक स्तर पर, पाँच खँडो मेँ बँटा हुआ है, यह भूभाग बरोज़ कहलाता है इन बरोज के नाम हैँ -

१) ब्रोन्क्स, २) ब्रूकलीन, ३) मनहट्टन, ४) क्वीन्स और

 ५) स्टेटन आइलेन्ड।

मेनहैट्टन की स्थापना डच मूल के लोगोँ ने सन १६२५ मेँ की थी।इसका क्षेत्रफल ३२२ या ८३० किलोमीटर था। यह विश्व का बृहदतम शहरी इलाका है जिसकी आबादी १८ . ८ कोटि जन से अधिक है। यहाँ विश्व के हर देश से लोग आकर बसे हुए हैं।

सँयुक्त राष्ट्र सँघ के अति विशाल तथा प्रत्येक आधुनिक सुरक्षा साज सज्जा तथा उपकरणों से लैस, विशाल भवन के बाहर एक पाषाण शिल्पाकृति बनी हुई है जिसकी तस्वीर संलग्न है। जिस में बन्दूक की नलिका का मुंह मोड़ दिया गया है। या बंद कर दिया गया है जिसे  देख विचार आता है कि , काश ऐसा हो कि  भविष्य में , सम्पूर्ण  विश्व मेँ, अहिँसा का प्रचार व प्रसार हो ! तथा अमन और शाँति का सँदेश फैल कर २१ वीँ सदी में समग्र मानव जाति के लिये सुख और समृद्धि लाये। युद्ध और विनाश से छुटकारा हो।एक शाश्वत सर्वोदय”  सँदेश उभरे और यह अमर सँदेश भारत की  हिंदी भाषा में  हो !

यू. के. एवं उत्तर अमरीका और पश्चिम में प्रवासी भारतीयों के आगमन के इतिहास की कुछ महत्त्वपूर्ण खोज इस प्रकार है।

ब्रिटेन की लेखिका रश्मि देसाई की शोध पुस्तक, के अनुसार ‘Indian Immigrants in Britain,’ (London: Oxford University Press, 1963) द्वितीय विश्व युध्ध से पहले, भारतीय प्रवासी व्यक्तियों का ब्रिटेन में नही वत आगमन हुआ था जो सबसे पहले ब्रिटेन पहुंचे वे भारतीय , छात्र , पेशेवर व्यक्ति या  नाविक थे।

सन १९३९, बिर्मिन्ग्हम शहर में लगभग १०० के करीब भारतीय थे भारतीय और पाकिस्तानी मूल के लोगों की कुल संख्या ब्रिटेन में बढकर सन १९५५ तक १०,७०० हो गई थी।

 सन १९९१ की जन गणना (सेन्सस) के अनुसार यह  संख्या बढ़कर ८४० ,२५५ हुई और पाकिस्तानी मूल के लोगों को मिलाकर ४७६,५५५ कुल हो  चुकी थी जिनमें  १६२,८३५ बंगलादेशी भी शामिल थे।

उत्तर अमरीकी भूखंड पर Luce–Celler Act के सन १९४६ में पारित होने के बाद से भारतीय प्रवासीयों को अमरीकी नागरिकता और उत्तर अमरीका में नागरिक की हैसियत से बसने  के हक मिले थे। 

ज्यादातर,मलेशिया,सिंगापुर,दक्षिणअफ्रीका,सूरीनाम,गुयाना,फिजी,केन्या,तंज़ानिया,युगांडा, त्रिनिदाद और टोबागो, जमैका और मोरिश्यस से पहले भारतीय मूल के लोग अन्य देशों में बसने लगे थे।

प्रवासी प्रजा , भारत के अलग अलग स्थानों से प्रदेश की यात्रा करते हुए कई विभिन्न परदेसी धरा पर आ आ कर स्थायी हुए। भारत से निकली प्रजा में हिन्दू, जैन, बौध्ध, ईसाई, मुसलमान, पारसी और सिख धर्मावलम्बी लोग शामिल थे।

सन १७९० मेँ प्रथम काला सागर पार कर के मद्रास के एक अनाम व्यक्ति मेसेच्य्सेट्स के सेलम की गलियोँ मेँ पहली बार पहुँचे थे।

१८२० से १८९८ तक ५२३ और लोग आ पाये। १९१३ तक ७००० और आये। १९७१ मेँ, अमरीकी कोन्ग्रेस ने इस  पर रोक लगा दी। १९४३ मेँ जब चीन के अप्रवासीयोँ पर से रोक उठाई गई तब प्रेसीडेन्ट रुज़वेल्ट के बाद आये राष्ट्रप्रमुख ट्रूमेन के शासन काल मेँ ३ जुलाई १९४६ मेँ जो ' एशियन अमेरीकन सिटीज़नशीप एक्ट ' पारित किया गया था उसी के बाद फिर बदलाव आया।

भारतीय प्रजा के प्रवासी दस्ते के आगमन के संग हिन्दी ' भाषा भी विदेश में दाखिल हुयी। हिन्दी असोशीयेन ओफ पसेफिक कोस्ट ने १ नवम्बर १९१३ मेँ गदरपत्रिका मेँ निम्न लिखित घोषणा की थी -' हम आज विदेशी भूमि पर अपनी भाषा मेँ ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध की घोषणा करते हैँ  ! '

' ग़दर ' पत्रिका से सँबध्धति थे लाला हरदयाल, दलित श्रमिक मँगूराम और १७ वर्षीय इँजीनीयर करतार सिँह सरापा! वे सभी परम् देश भक्त व बड़े हिम्मती कार्यकर्ता थे ।

१६ नवम्बर १९१५ के अपयशी दिवस १९ वर्षीय सरापा को ब्रिटिश साम्राज्य के विरोध में अपनी आवाज़ उठाने के जुर्म में, ब्रिटिश साम्राज्य का शत्रु मुकर्रर किया गया और सरापा को  भारत मेँ फाँसी पर चढाया गया था। शहीद भगत सिँह ने सरापा को अपना गुरु माना था। सरापा का अँतिम गीत था,

' यही पाओगे, मशहर मेँ जबाँ मेरी बयाँ मेरा,

मैँ बँदा हिन्दीवालोँ का हूँ खून हिन्दी, जात हिन्दी,

यही मज़हब, यही फिरका, यही है, खानदाँन  मेरा !

मैँ इस उजडे हुए भारत के खँडहर का ही ज़र्रा हूँ

यही बस पता मेरा, यही बस नामोनिशाँ मेरा ! '

ना जाने सरापा की अस्थियाँ गँगा मेँ मिलीँ या नहीँ ? ऐसे कई  भारत माता के वीर सपूतों की कथा हिंदी भाषा और अप्रवासी भारतीयों की बलिदान की कथा के संग इतिहास के पन्नों में कैद है। आज हम श्रद्धानत हो,उन्हें कर बध्ध, अंजलि देते हैं।

हिन्दी भाषा भारती, सँस्कृत की ज्येष्ठ पुत्री है ! सँत विनोबा भावे जी का यह कहना है और आज यह हिन्दी की भागीरथी विश्व के हर भूखँड मेँ बह रही  है!  जहाँ कहीँ एक भारतीय बसता है, वहीं हिंदी भी बसी हुई है और फूल फल रही है।  मेरी कविता मेँ मैँने कहा है,

' हम भारतीय जन मन मेँ, कहीँ गँगा छिपी हुई है ' हिन्दी भाषा की गरिमा फिर एक बार, भारतेन्दु हरिस्चन्द्र जी के शब्दोँ को चरितार्थ करे यह आशा है। ' निज भाषा उन्नति ही उन्नति का मूल है '

आओ, प्रण करेँ हिन्दी सेवा का, हिन्दी प्रेम का !

जननी जन्मभूमिस्च स्वर्गादपि गरीयसी”.

सत्यमेव जयते जय हिंद !

 –श्रीमती  लावण्या दीपक शाह

   उत्तर अमेरिका , ओहायो प्रांत से