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जनकृति का मई-जून 2017 सयुंक्त अंक आप सभी पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है. अंक में प्रकाशित सामग्री आप विषय सूची के आधार पर बायीं ओर स्तम्भ में पढ़ सकते हैं.

कम्यूटर अनुवाद और हिंदी

'कंप्यूटर अनुवाद और हिंदी'

पूजा तिवारी

  शोधार्थी

 हिंदी विभाग, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय

ईमेल - tipu1615@gmail.com

 

शोध सार

कंप्यूटर अनुवाद ने अनुवाद के क्षेत्र को एक नई दिशा और नया आयाम देने का काम किया है. कंप्यूटर अनुवाद के माध्यम से मानव द्वारा किये जा रहे अनुवाद को अधिक गति और बल मिला है. इस अनुवाद ने अनुवाद के क्षेत्र का विस्तार ही नहीं किया बल्कि कह सकते हैं, मानव के ज्ञान के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया है. प्रस्तुत शोध पत्र के माध्यम से कंप्यूटर अनुवाद के सामान्य परिचय के साथ उसके स्वरुप और उसके क्षेत्र से परिचित हुआ जा सकेगा. इसके साथ ही हिंदी भाषा के क्षेत्र में कंप्यूटर अनुवाद के सम्बन्ध में हुए विकास और इससे भाषा पर पड़ने वाले प्रभाव को समझ सकेंगे. कंप्यूटर अनुवाद की दिशा में हिंदी के भविष्य की संभावनाओं को देखना भी, इस शोध पत्र का लक्ष्य है. मुख्यतः यह शोध पत्र हिंदी भाषा के क्षेत्र में कंप्यूटर अनुवाद की दिशा में हुए तकनीकी विकास को रेखांकित करता है. शोध पत्र को विषयवस्तु की सुगमता की दृष्टि से निम्नलिखित बिन्दुओं के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है :-

  • कंप्यूटर अनुवाद : परिचय, पद्धति, प्रकार और प्रक्रिया
  • कंप्यूटर अनुवाद और हिंदी : भारत में हिंदी में कंप्यूटर अनुवाद की नयी तकनीकों के विकास के सन्दर्भ में
  • कंप्यूटर अनुवाद और हिंदी : लाभ और समस्याएं
  • उपसंहार

 

बीज शब्द

# द्विभाषिक और बहुभाषिक अनुवाद, मैट, पार्सर, लेक्सिकान, जेनेरेटर

 

 

 

 

  1. कंप्यूटर अनुवाद : परिचय, प्रकार, पद्धति और प्रक्रिया

'To translate is to change into another language retaining the sense.'

('अनुवाद मूलभाषा की सामग्री के भावों की रक्षा करते हुए उसे दूसरी भाषा में बदल देना है.')                                                                                    - सैमुअल जॉन्सन

परिचय :-

      सैमुअल जॉन्सन द्वारा दी गयी उपरोक्त परिभाषा 'अनुवाद' के अर्थ को अत्यंत ही सरल शब्दों में व्यक्त कर देती है. अनुवाद की शाब्दिक उत्पत्ति के आधार पर भी उसके अर्थ को समझा जा सकता है. वस्तुतः अनुवाद शब्द 'अनु' उपसर्ग और 'वद्' धातु का संयोजन है जिनका अर्थ क्रमशः 'अनंतर' और 'कथन' है. इस प्रकार अनुवाद को 'दुहराव' या 'पुनर्कथन' भी कह सकते हैं. हिंदी के प्रसिद्ध अनुवादक और भाषाविद् डॉ भोलानाथ तिवारी ने अनुवाद को कुछ इस तरह से परिभाषित किया है,''एक भाषा में व्यक्त विचारों को यथासंभव समान और सहज अभिव्यक्ति द्वारा दूसरी भाषा में व्यक्त करने का प्रयास अनुवाद है.'' वर्तमान भाषा वैज्ञानिको और अनुवादकों ने विषय, प्रयोजन और अनुवाद की प्रकृति के आधार पर अनुवाद के विभिन्न भेद किये हैं, जैसे- काव्यानुवाद, प्रशासनिक, बैंकिंग या विज्ञापन अनुवाद और साथ ही शब्दानुवाद, भावानुवाद, व्यख्यानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद इत्यादि. इसी अनुवाद का एक अन्य प्रकार है 'कम्प्यूटर अनुवाद या मशीनी अनुवाद' जो अनुवाद के क्षेत्र में अपेक्षाकृत नया है.

      वैज्ञानिक और तकनीकी आवश्यकताओं के उपरान्त हुए शोधों ने 'कम्प्यूटर' को जन्म दिया. तब से इसने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को तेजी से प्रभावित किया है. 'कम्प्यूटर' शब्द अंग्रेजी के 'कम्पयूट' से बना है जिसका अर्थ है 'गणना'. किन्तु कम्प्यूटर का काम केवल गणना करना ही नहीं है, बल्कि कम्प्यूटर वस्तुतः एक इनपुट (आगत) डिवाइस (यंत्र) है जो इनपुट के माध्यम से आकड़ों को ग्रहण करता है, प्रोसेस (संसाधित) करता है और उन्हें निर्धारित स्थान पर स्टोर (संग्रहित) करता है. इसे सूचना के माध्यम से संगणना करने वाला उपकरण कह सकते हैं. 'हार्डवेयर' (कंप्यूटर मशीनरी) और 'सॉफ्टवेयर' (क्रमानुदेश) के माध्यम से इसमें सूचनाओं को संग्रहित किया जाता है. 'इन्साइक्लोपीडिया डिक्शनरी ऑफ़ कम्प्यूटर साइंस' में कम्प्यूटर के सम्बन्ध में कहा गया है :-

      ''Any machine which is able to accept data in a prescribed form, process the data and supply the results of the processing in a specified format as information or as signal for controlling automatically some further machine or process. The term is used generally for any kind of computing device, the three main categories being digital computers, analogue computers and hybrid computers.'' विकास के प्रारंभिक चरणों में कम्प्यूटर, वैज्ञानिक और गणितीय प्रयोगों में ही प्रयुक्त होता रहा, किन्तु अनेक नये सॉफ्टवेयर इजात होने के साथ ही यह जीवन के हर क्षेत्र में प्रयोग होने लगा. हालाकि कम्प्यूटर की अपनी एक भाषा है किन्तु क्रमिक रूप से विकसित होते हुए कम्प्यूटर ने अंकों की दुनिया से आगे बढ़कर भाषा की दुनिया को भी अपने दायरे में समेटना प्रारम्भ किया. कम्प्यूटर की निरंतर बढती इसी क्षमता के सम्बन्ध में प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफेन हाकिंग ने कहा,'' Computers double their perfomance every 18 months. The danger that they could develop intelligence and take over the world is real.''

      कंप्यूटर के विकास ने कंप्यूटर अनुवाद का मार्ग प्रशस्त किया. 'कम्प्यूटर अनुवाद' एक तरह का यांत्रिक अनुवाद है जिसमें सॉफ्टवेयर की सहायता से एक प्राकृतिक भाषा के टेक्स्ट या वाक् का अनुवाद दूसरी प्राकृतिक भाषा के टेक्स्ट या वाक् में किया जा सकता है. इसे 'मशीनी' या 'यांत्रिक अनुवाद' भी कहते हैं. इसे परिभाषित करते हुए डॉ. दीपा गुप्ता लिखती हैं, ''मशीनी अनुवाद एक ऐसीं प्रक्रिया है जो पाठ की इकाइयों को एक भाषा (स्त्रोत भाषा) से दूसरी भाषा (लक्ष्य भाषा) में कम्प्यूटर के माध्यम से परिवर्तित करती है.'' प्रो. सूरजभान सिंह के अनुसार,'' अनुवाद की ऐसी प्रक्रिया जिसमें कम्प्यूटर प्रणाली (system) के जरिये एक भाषा से दूसरी भाषा में अपने आप अनुवाद हो, इस प्रक्रिया में अनुवाद की जाने वाली सामग्री (text) को आगत (input) शब्द के रूप में देते हैं. कम्प्यूटर की भीतरी प्रणाली जिसमें दोनों भषाओं के शब्दों, मुहावरों और व्याकरणिक नियमों का ज्ञान संचित रहता है, अपने आप उस सामग्री का दूसरी भाषा में अनुवाद करती है और कुछ ही क्षणों में अनूदित सामगी निर्गत पाठ के रूप में प्राप्त हो जाती है.'' डॉ. वृषभ प्रसाद जैन के अनुसार, ''मशीनी अनुवाद से अभिप्राय किसी एक भाषिक पाठ के संप्रेष्य अर्थं को लेकर संगणक की सहायता से अन्य भाषिक पाठ में रूपांतरित करने से लिया जाना है.'' डॉ. पूरन चन्द्र टंडन के मतानुसार, ''कंप्यूटर अनुवाद से अभिप्राय अनुवाद की प्रक्रिया के उस चरण से है जिसमें स्त्रोत भाषिक पाठ के संप्रेष्य अर्थ को कम्प्यूटर प्रणाली के जरिये लक्ष्य भाषिक पाठ में रूपांतरित किया जाता है.'' डॉ हरीश कुमार सेठी ने कंप्यूटर अनुवाद के तीन घटक बताएं हैं :-

(क) भाषा :- कंप्यूटर अनुवाद में जिस घटक का सर्वप्रथम महत्व है वह है भाषा. भाषा घटक के अंतर्गत भाषा सामग्री (कॉरपस) और व्याकरण नामक तत्व आते हैं. कार्पस में विभिन्न प्रकार के कोश सम्मिलित होते हैं. दूसरी ओर व्याकरण समस्त कॉर्पस को एक सूत्र में बांधने का प्रयास करता है जिसकी क्षमता बहुत कुछ कम्यूटर की क्षमता पर निर्भर करती है. व्याकरण लक्ष्य भाषा और स्त्रोत भाषा के साथ-साथ उन्हें जोड़ने वाला भी होता है जिसे अंतरण व्याकरण (ट्रान्सफर ग्रामर) कहते हैं. यह आवश्यकतानुरूप विभिन्न प्रकार के व्याकरणिक नियमों या 'फार्मेलिज्म' पर आधारित होता है जिसके लिए अलग-अलग मॉडलो की आवश्यकता होती है. कुछ प्रमुख मॉडल इस प्रकार हैं - लेक्शिकल फंक्शनल ग्रामर, जेनेरेलाइज्ड फेज़ स्ट्रक्चर ग्रामर, कांट्रेक्ट फ्री ग्रामर, ट्री एडज्वाइनिंग ग्रामार (TAG), जी.बी. थियरी, फंक्शनल युनिफिकेशन ग्रामर, डेफिनिट क्लॉज ग्रामार (DCG) आदि.

(ख) कम्प्यूटर :- कंप्यूटर अनुवाद के लिए कंप्यूटर घटक अत्यंत महत्वपूर्ण होता है जिसमें अनुवाद सिस्टम और सहायक उपकरण नामक दो उपघटक होते हैं. पूरा अनुवाद सिस्टम पहले से एक निर्धारित प्रक्रिया पर कार्य करता है जिसे 'स्केमा' कहा जाता है. अनुवाद सिस्टम, पार्सर (पद्निरूपक) और जेनेरेटर (जनित्र) के आधार पर कार्य करता है. पार्सर का कार्य इनपुट की गयी सामग्री को विभिन्न इकाइयों जैसे-संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया आदि में बाँट देना है, जिससे स्त्रोत भाषा के तत्वों को पहचानने में सुविधा हो जाती है. जनित्र अपनी सामग्री अंतरण कोश (ट्रांसफर लेक्सिकान) से प्राप्त करता है जिसमें प्रत्येक शब्द अपनी व्याकरणिक विशेषताओं के साथ उपस्थित होता है. सहायक उपकरण के अंतर्गत रूप विश्लेषक (मौर्फोलोजिकल एनेलाइजर), पदबंध अंकक (फ्रेज मार्कर), शब्द-वर्गों को चिन्हित करने वाला 'पार्ट ऑफ़ स्पीच टैगर' आदि आते हैं.

(ग) मानव घटक :- कंप्यूटर अनुवाद में मानव घटक की भूमिका तीन रूपों दिखाई देती है-विकासकर्ता, सहायक, और प्रयोक्ता. मानव के इसी सहयोग को व्याख्यायित करते हुए क्लाड पायरन (Claude Piron) लिखते हैं,''Machine translation is a process whereby a computer program analyses a source text and, in principal produces target text without human intervention, in reality however machine translation, typically does involve human intervention in the form of pre-editing and post-editing.'' मानव द्वारा कम्प्यूटर अनुवाद में निम्नलिखित कार्यों को संपादित किया जाता है:-

कंप्यूटर अनुवाद पश्च संपादन - यह कंप्यूटर द्वारा किये गये रफ अनुवाद के बाद मानव अनुवादक द्वारा किया जाता है.

कम्यूटर अनुवाद पूर्व संपादन - इसमें कंप्यूटर द्वारा अनुवाद करने के पूर्व अनुवाद सामग्री का संपादन मानव अनुवादक के द्वारा किया जाता है.

अन्तरा-प्रोससेसिंग संपादन - इसमें मानव द्वारा कंप्यूटर से या कंप्यूटर द्वारा मानव से अनुवाद के सम्बन्ध में प्रश्न पूछकर सलाह ली जाती है.

पैरा प्रोसेसिंग - जब कम्प्यूटर के द्वारा अनुवाद करते समय संचित कोष में कोई शब्द नहीं मिलता तो वह सूचना देता है कि अमुक शब्द उसके कोष में नहीं है. ऐसे में मानव द्वारा उस शब्द को कोश में सम्मिलित करने का कार्य किया जाता है. इसे पैरा प्रोसेसिंग कहते हैं.

 

 

 

कंप्यूटर अनुवाद के प्रकार

 

 


भाषा के आधार पर                                         कार्यप्रणाली के आधार पर

                                                                                                     

                                                                             

                                                       पूर्णतः स्वचालित                  अर्धस्वचालित

सजातीय  विजातीय द्विभाषिक       बहुभाषिक                                                           

                                                                         मशीन सहायित      मानव सहायित

 

 

कंप्यूटर अनुवाद के प्रकार :- कंप्यूटर अनुवाद को कई दृष्टियों से विभाजित किया जाता

 

      है.                                             (रेखाचित्र 1)

सजातीय भाषा कंप्यूटर अनुवाद :- यह सामान धर्म और उत्पत्ति वाली भाषाओँ के बीच होने वाला अनुवाद है जैसे कि समस्त भारतीय भषाओं के बीच अनुवाद.

विजातीय भाषा कंप्यूटर अनुवाद :- यह गैर जातीय भाषाओँ के बीच अहोने वाल अनुवाद है जैसे -हिंदी-रूसी, या हिंदी-अंग्रेजी के बीच अनुवाद.

द्विभाषिक कंप्यूटर अनुवाद :- दो भाषों के बीच होने वाले अनुवाद को द्विभाषिक अनुवाद कहते हैं यह सजातीय या विजातीय हो सकता है. जैसे-हिंदी-जापानी अनुवाद या हिंदी-मराठी अनुवाद.

बहुभाषिक कंप्यूटर' अनुवाद :- एक साथ कई भाषाओँ में अनुवाद को बहुभाषिक अनुवाद कहते हैं.  

पूर्णतः स्वचालित कंप्यूटर अनुवाद - इस अनुवाद में मानव की कोई भूमिका नहीं होती. TAUM METO और MU अनुवाद प्रणाली पूर्णतः स्वचालित अनुवाद प्रणाली पर ही आधारित थीं.

अर्ध स्वचालित कंप्यूटर अनुवाद :- यह दो प्रकार का होता है - मशीन सहायक मशीनी अनुवाद तथा मानव सहायक मशीन अनुवाद.

कंप्यूटर अनुवाद की पद्धतियाँ  :- कंप्यूटर अनुवाद के लिए विभिन्न पद्धतियों का सहारा लिया जाता है जो अनुवाद को वैज्ञानिक रूप में पूर्ण करने में सहायक है.

         कंप्यूटर अनुवाद की पद्धतियाँ

                             

                                    ज्ञान आधारित           पद्धति                                    नियम आधारित पद्धति

                                उदाहरण आधारित पद्धति

                                          सांख्यिकी आधारित पद्धति

                                          प्रत्यक्ष पद्धति

                                          अंतरण पद्धति                                                     अंतर्भाषिक पद्धति

 

 

                                                      रेखाचित्र -2        

                                                     

ज्ञान आधारित कंप्यूटर अनुवाद - यह भाषा के अर्थपरक अनुवाद से सम्बंधित है. यह स्त्रोत भाषा के अर्थ को अनेक लक्ष्य भाषाओँ में एक साथ परिवर्तित करने में सक्षम है. 'ट्रांसलेटर' नामक अनुवाद परियोजना इसी प्रणाली पर आधारित है.

नियम आधारित कंप्यूटर अनुवाद :-नियम आधरित मशीन अनुवाद मूलतः प्राकृतिक भाषा के व्याकरणिक नियमों पर आधारित होती है. यह भाषाओं का वाक्यपरक व्याकरण हैं जो 'लेक्सिकान' के रूप में कंप्यूटर में पहले से ही फीड रहते है.

उदहारण आधारित कंप्यूटर अनुवाद :- यह वाक्यों की समरूपता के आधार पर किया जाने वाला अनुवाद है. कम्प्यूटर में पहले से एक ज्ञान आधारित कोष निर्मित कर फीड कर दिया जता है जिसे 'कार्पोरा' कहते हैं. इस कार्पस से अनुवाद के लिए समरूप वाक्य खोज कर कम्प्यूटर अन्य वाक्य का अनुवाद करता है. इसका क्रम कुछ इस तरह से होता है-

समरूप वाक्य की खोज > अतरिक्त शब्द को हटाना > हटाये गये शब्द के स्थान पर नया शब्द जोड़ना

सांख्यिकी आधारित कंप्यूटर अनुवाद :- इसके विषय में सर्वप्रथम वारेन वीवर ने 1949 में विचार प्रस्तुत किये थे. आई.बी.एम्. ने सर्वप्रथम CANDIDE नामक प्रथम सांख्यिकी मशीन अनुवाद सोफ्टवेयर तैयार किया. इस प्रणाली का प्रयोग गूगल, माइक्रोसोफ्ट, लैंगुएज वीवर जैसे कम्पनियां कर रही हैं. इस पद्धति के अंतर्गत शब्द और वाक्यों की संरचना के अनुरूप सांख्यकीय मॉडलों को विकसित कर अनुवाद की प्रक्रिया में प्रयोग में लाया जाता है.

प्रत्यक्ष कंप्यूटर अनुवाद :- इस पद्धति में किसी पार्सर या भाषा वैज्ञानिक विश्लेषण की आवश्यकता नहीं होती. इसमें स्त्रोत भाषा के वाक्य विन्यास और शब्दावली का विश्लेषण करने के बाद उसे लक्ष्य भषा के वाक्य विन्यास के में संयोजित कर दिया जता है. एक प्रकार से यह शब्दशः अनुवाद की पद्धति है. इसके आधार पर SYSTRAN, CULT, TITUS, LOGOS आदि प्रणालियों का विकास किया गया था.

अंतरण कंप्यूटर अनुवाद पद्धति :- इस विधि के लिए पद निरूपण की परिकल्पना की गयी. इस पद्धति में स्त्रोत भाषा के वाक्य का व्याकरणिक विश्लेषण कर उसका पद निरूपण किया जाता है. तत्पश्चात इस पद निरूपण को लक्ष्य भाषा के अनुरूप अंतरित किया जाता है. इस अनुवाद पद्धति में व्याकरण की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. इस पद्धति के अनुसार TAUMETEO, TAUM AVIATION, SUSY,GETA आदि कंप्यूटर प्रणालियों का विकास किया गया था.

अंतर्भाषिक कंप्यूटर अनुवाद पद्धति :- इस पद्धति के अंतर्गत सर्वप्रथम एक मध्यस्थ भाषा का विकास किया जाता है जिसे 'सार्वभौम भाषा', 'इण्टरलिंगुआ' अथवा 'अंतराभाषा' भी कहा जाता है. इस पद्धति में स्त्रोत भाषा के पाठ का विश्लेषण कर मध्यस्थ भाषा में प्रस्तुत किया जाता है. तत्पश्चात मध्यस्थ भाषा द्वारा निरूपित अर्थ को लक्ष्य भाषा के रूप में संयोजित कर दिया जाता है. यह कृत्रिम बुद्धि पर आधारित प्रणाली है. जापान की 'फिजित्सु' प्रणाली इसी के आधार पर विकसित की गयी.

कंप्यूटर अनुवाद की प्रक्रिया:-

कंप्यूटर अनुवाद एक अत्यंत ही जटिल प्रक्रिया है. इस सम्बन्ध में पश्चिमी और पूर्वी मतों में अंतर है. पश्चिमी मत के सन्दर्भ में नाइडा, न्युमार्क और बाथगेट के मत प्रमुख हैं जिन्हें डॉ.सुरेश कुमार अपनी पुस्तक 'अनुवाद सिद्धांत की रूप रेखा' में प्रस्तुत करते है. इसके अतिरिक्त पूर्वी मत में डॉ. जी. गोपिनाथन, डॉ कृष्ण कुमार गोस्वामी, रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव, के मत महत्वपूर्ण हैं. किन्तु सर्वसम्मति से कंप्यूटर अनुवाद की प्रक्रिया तीन चरणों में संपन्न मानी जाती है. यह प्रक्रिया नाइडा के द्वारा बताई गयी है -

कंप्यूटर अनुवाद की प्रक्रिया

विश्लेषण                      अंतरण                       पुनर्गठन

                                                                 

वाक्य और शब्दों का  संरचनात्मक अंतरण/ मिलान          रूपात्मक पुनर्गठन/परिवर्तन 

वर्गीकरण                                                                                                                 

                                                     

स्त्रोत- पार्सर                           स्त्रोत- लेक्सिकान                 स्त्रोत-जेनेरेटर

 

 

 

 

 

 

 

रेखाचित्र -3

विश्लेषण :- अनुवाद की प्रक्रिया में सर्वप्रथम स्त्रोत भाषा के वाक्यों का विश्लेषण किया जाता है. यह विश्लेषण पद निरूपक (पार्सर) तथा शब्द-विश्लेशित्र के सहयोग से संपन्न किया जाता है.

अंतरण :- वाक्य विश्लेषण से प्राप्त अर्थ को लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्त करने के लिए अंतरण की प्रक्रिया अपनाई जाती है. इसके लिए अनुवादित्र (ट्रांसफर लेक्सिकान) सहयोगी होता है. यह द्विभाषी कोश में से अर्थ खोजने का कार्य करता है और तत्पश्चात अंतरण कोश दोनों भाषाओँ के शब्दों, वाक्यों और अर्थों में सामंजस्य स्थापित करते हुए, दोनों भाषाओं के समानार्थी शब्दों का चयन कर उन्हें प्रस्तुत करता है.

पुनर्गठन :- इस प्रक्रिया में जनित्र (जेनेरेटर) अंतरण कोष से प्राप्त शब्दावलियों को लक्ष्य भाषा में अनूदित कर देता है. जनित्र यह कार्य स्त्रोत भाषा के शब्दों के स्थान पर लक्ष्य भाषा के शब्दों को प्रतिस्थपित करते हुए करता है.

                             

  1. कंप्यूटर अनुवाद और हिंदी : भारत में हिंदी में कम्प्यूटर अनुवाद की नयी तकनीकों के विकास के संदर्भ में

      मशीनी अनुवाद की अवधारणा का विकास 1946 में अमेरिका के 'वारेन वीवर' ने किया जो 1949 में उनके द्वारा प्रस्तुत अनुवाद सम्बन्धी ज्ञापन 'ऑन ट्रांसलेशन' में देखा जा सकता है जिसमें कम्प्यूटर अनुवाद की संभावनाओं पर विचार व्यक्त किये गये थे. इसके बाद इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर शोध कार्य किया जाने लगा. जार्जटाउन यूनिवर्सिटी ने 1954 में इस क्षेत्र में एक 'इक्स्पेरिमेंट सिस्टम' विकसित किया जिसे आई.बी.एम. कम्पनी के सहयोग से बनाया गया. इसके द्वारा गणित सम्बन्धी 60 वाक्यों का रूसी से अंगेजी में अनुवाद किया जा सकता था. 1956 में लन्दन में पहली बार यांत्रिक अनुवाद पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन हुआ. इस सम्मलेन ने सभी देशों को कंप्यूटर अनुवाद की दिशा में आगे बढ़ने और नये प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया. 1962 में अमेरिका में 'मशीन ट्रांसलेशन एंड कम्प्युटेशनल लिंग्विस्टिक एसोसिएशन' का गठन हुआ, जिससे इस दिशा में हो रहे शोध कार्य को और अधिक गति और बल मिला. इस दिशा में 1964 में 'नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस' ने मशीन अनुवाद का अध्ययन करने के लिए 'आटोमेटिक लैंगुएज प्रोसेसिंग एडवाईजरी कमिटी' (ALPAC) का गठन किया. इस कमिटी की रिपोर्ट के बाद अमेरिकी प्रशासन ने कंप्यूटर अनुवाद के सम्बन्ध में शोध कार्य के लिए वित्तीय सहायता बंद कर दिया, जिसके कारण इस दिशा में शोध कार्य काफी मंद पड़ गया. किन्तु आगे चलकर, वैश्विक परिस्तिथियों के कारण कम्प्यूटर अनुवाद की मांग तेजी से बढ़ने लगी जिसके कारण इस दिशा में 1970 के बाद फिर से गति दिखाई पड़ने लगी.

विश्व में कंप्यूटर अनुवाद का विकास :- विश्व में कम्प्यूटर अनुवाद की तकनीक का विकास कम्प्यूटर की क्रमशः बढती हुई क्षमता के अनुरूप क्रमिक रहा है जिसे निम्लिखित चरणों में बांटकर देखा जा सकता है-

प्रथम चरण (1900-1970):-

इस चरण में विकसित मशीनी अनुवाद के लिए प्रत्यक्ष विधि अपनाई गयी. यह केवल शाब्दिक अनुवाद तक सीमित थी. 1960 के दशक में टेक्सास विश्वविद्यालय के भाषा अनुसन्धान केंद्र में जर्मन से अंग्रेजी अनुवाद के लिए विकसित METAL, जार्जटाउन विश्वविद्यालय के द्वारा रूसी-अंग्रेजी अनुवाद के लिए 1964 में विकसित GAT, 1968 में हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय के द्वारा गणित और भौतिकी से सम्बंधित पत्रिकाओं को अंग्रेजी में अनूदित करने के लिए विकसित GULT प्रणाली,

 

द्वितीय चरण (1970-1985) :-

1970 के अंत में अंतरण विधि से युक्त कम्प्यूटर का विकास किया गया. इसमें पार्सिंग (पद निरूपण) का प्रयोग किया गया. LOGOS प्रणाली (1973 में अमेरिका में अंग्रेजी से वियतनामी भाषा में वायु सेना सम्बन्धी अनुरक्षण नियमावली को अनूदित करने के लिए), 1976 में विकसित SYSTRAN, TITUS (फ्रेंच वस्त्र संस्थान पेरिस द्वारा जर्मन, स्पेनिश, फ्रेंच और अंग्रेजी भषाओं के बीच परस्पर अनुवाद के लिए विकसित), 1977 में मांट्रियल विश्वविद्यालय, कनाडा द्वारा मौसम सम्बन्धी घोषणाओं को अंग्रेजी से फ्रेंच में अनूदित करने के लिए 'TAUN-METEO प्रणाली, 1980 के दशक में अंग्रेजी-कोरियाई, जापानी-कोरियाई आदि कंप्यूटर अनुवाद के लिए विकसित प्रणालियाँ MATES/EK' 'Trainne', 'Word Change' 'INGUIDE', J Seoul/jk, 'Hangal GANA', 'Myungpoom' और 'Ogyung Paska', 1981 में SYSTRAN जापानी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से जापानी अनुवाद के लिया, पैन अमेरिकन हेल्थ आर्गेनाईजेशन द्वारा SPANAM और ENGSPAN नामक अनुवाद प्रणालियों का विकास, 1984 में विकसित रूस-जर्मन प्रोटोटाइप सिस्टम पर आधारित Susy प्रणाली, 1985 में गेनोबल विश्वविद्यालय, फ़्रांस के द्वारा विकसित GETA प्रणाली, क्योटो विश्वविद्यालय के द्वरा जापानी और अंग्रेजी भाषा के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी प्रलेखो के अनुवाद के लिए 1985 में विकसित MU प्रणाली, इजराइल में 1985 में विकसित TOVNA MACHINES नामक अनुवाद प्रणाली इत्यादि.

तृतीय चरण (1985-वर्तमान) :-

इस चरण में 'इंटरलिंग्वा विधि' का प्रयोग कर अनुवाद के लिए कंप्यूटर प्रणालियों को विकसित किया गया. इसके उदाहरण हैं - 1982 में नीदरलैंड में बी.एस.ओ. लैंगुएज ट्रांसलेशन प्रणाली, 1988 में लायी गयी अंग्रेजी-चीनी अनुवाद प्रणाली 'TRANSTAR', यूरोपीय आर्थिक समुदाय की सात सरकारी भाषाओं (अंग्रेजी, फ्रांसीसी, जर्मन, डच, डेनिश, इतालवी, और ग्रीक) का आपस में किसी भी भाषा में अनुवाद करने के लिए 1990 में विकसित 'युरोट्रा' (EUROTRA) प्रणाली, फुजीत्सू कंपनी जापान के द्वारा विकसित ATLAS-G, ATLAS-2, प्रणाली तथा कंप्यूटर से अनुवाद करने के लिए एक विशेष प्रोग्रामिंग भाषा 'कोमिट' का अमेरिका की एम्.आई.टी. कंपनी के द्वारा विकास इत्यादि.

 

भारत में कम्प्यूटर अनुवाद प्रणाली का विकास (हिंदी भाषा के विशेष संदर्भ में) :-

      चूँकि कंप्यूटर की शरुआत रोमन लिपि वाले देशों में हुई इसलिए भारतीय भाषाओं में अनुवाद की प्रणाली विकसित करने में काफी समय लगा. भारत में कंप्यूटर अनुवाद की दिशा में कार्य 1980 के दशक में प्रारंभ हुआ. कंप्यूटर विकास की चौथी पीढ़ी में ही हिंदी को शामिल किया जा सका. ऐसा भाषा परिवर्तन की जटिलता के कारण हुआ. इस दिशा में 1979 से भारत सरकार की तरफ से प्रोत्साहन दिया जाना प्रारंभ होता है. भारत सरकार के तत्कालीन इलेक्ट्रानिक विभाग द्वारा 'कंप्यूटर आधारित सूचना प्रणालियों की भाषापरक समस्याएं' विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गयी. इस दिशा में के. सी. चेलामुत्तू के रूसी-तमिल कंप्यूटर अनुवाद तथा 'नेशनल सेंटर फॉर सोफ्टवेयर टेक्नोलाजी' मुंबई में आर. चंद्रशेखर के प्रयास महत्वपूर्ण हैं. किन्तु इस दिशा में ये प्रयास पर्याप्त नहीं रहे. बंगलोर के भारतीय विज्ञान संस्थान के प्रो. पी.सी. गणेश सुन्दरम के निर्देशन में अंग्रेजी, हिंदी, कन्नड़, तमिल, और रूसी भाषा में सरल वाक्यों के लिए विशेष कंप्यूटर अनुवाद प्रणालियों को विकसित किया गया. इसके अतिरिक्त तंजावुर के तमिल विश्वविद्यालय द्वारा रूसी से तमिल में कंप्यूटर अनुवाद का विकास किया गया. उपरोक्त प्रयासों के क्रमिक विकास के फलस्वरूप हिंदी से अन्य भाषा और अन्य भषाओं से हिंदी अनुवाद के लिए निम्नलिखित प्रणालियाँ विकसित की गयीं :-

अक्षर भारती :- यह प्रणाली भारतीय भाषाओँ के बीच पार्सर और प्रजनक तैयार करने के लिए आई.आई.टी. कानपुर के द्वारा विकसित की गयी. इसके अंतर्गत हिंदी, कन्नड़ और उर्दूं के पार्सर और प्रजनक विकसित किये गये.

मन्त्र राजभाषा :- सी डेक, पुणे ने भारत सरकार के राजभाषा विभाग के लिए इस अंग्रेजी-हिंदी कम्प्यूटर अनुवाद प्रणाली का विकास किया. इस पर 1997 में कार्य प्रारंभ हुआ. इसमें TAG (tree adjoining grammer) नामक व्याकरणिक मॉडल का सहारा लिया गया है. यह मानक एवं शीघ्र गति से हिंदी अनुवाद में सहायक है. इस सॉफ्टवेयर को राज्यसभा के लिए विकसित किया गया है. यह सदन में रखे जाने वाले कागजातों, बुलेटिन भाग-1, भाग-2, कार्य विभाजन सूची आदि का अनुवाद करता है. यह आम जन के प्रयोग के लिए तीन रूपों में उपलब्ध है-मन्त्र राजभाषा स्टैंडअलोन, मन्त्र राजभाषा इंटरनेट, तथा मन्त्र राजभाषा इंट्रानेट. किन्तु इसके प्रयोग के लिए कंप्यूटर सिस्टम में पेंटियम-4, गीगाहर्ट्ज़, विडोज़ 2000, 256 RAM आदि की आवश्यकता होती है.

मैट :-  मशीन सहयित अनुवाद प्रणाली MAT का विकास आई.आई.टी. कानपुर के द्वारा किया गया. इस प्राणाली पर कार्य 1990 में प्रारंभ हुआ. इसे स्वास्थ्य मंत्रालय के जन स्वास्थ्य अभियान से सम्बंधित अंग्रेजी मैनुअलों का हिंदी अनुवाद करने के लिए विकसित किया गया था. यह उदाहरण आधारित अनुवाद प्रणाली पर है जिससे 60 प्रतिशत तक शुद्ध अनुवाद प्राप्त किया जा सकता है.

आंग्ला-भारती :- मशीन संसाधित अनुवाद तंत्र को विकसित करने की दिशा में आई.आई.टी. कानपुर के आर.एम्.के. सिन्हा ने 1991 में अंग्रेजी से भारतीय भाषाओं के अनुवाद के लिए 'आंग्ला भारती' प्रणाली का विकास किया. यह नियम आधरित तथा उदहारण आधारित पद्धति पर आधारित है. आंग्ला भारती के आधार पर ही 'आंग्ल हिंदी' नाम से अनुवाद तंत्र का विकास किया गया. यह जावा इंटरफेस पर चलने वाली प्रणाली है. इसके साथ ही 1995 में प्रो. सिन्हा के द्वारा ही सजातीय और विजातीय भाषाओं के मशीन साधित अनुवाद के लिए 'अनुभारती' नामक प्रणाली का विकास किया गया. आंग्ला-भारती के अतिरिक्त सी.डेक नोएडा के द्वारा शब्द-संसाधन के लिए 'लेखिका', हिंदी में वर्ण पहचान के लिए 'चित्राक्षरिका', द्विभाषिक शब्दकोश 'शब्दिका', ऑन लाइन हिंदी विश्वकोश, ऑनलाइन द्विभाषी आई.टी. शब्दावली, बहुभाषी समान्तर कार्पस 'ज्ञान निधि' और पाठ से वाक् संश्लेषक आदि का भी विकास किया गया. अंग्रेजी से अन्य भारतीय भाषाओँ में अनुवाद प्रणाली के विकास के लिए 'आंग्ल भारती मिशन' की शुरुआत की गयी.

मात्रा :- नेशनल सेंटर फॉर सॉफ्टवेयर टेक्नोलोजी मुंबई और सी डेक मुंबई ने 1995 में अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के लिए 'मात्रा' प्रणाली का विकास किया. यह अर्थपरक विश्लेषण पर आधारित प्रणाली है.

अनुसारक :- यह 'इंटरलिंग्वा पाणिनीय फ्रेमवर्क' है जिसे आई.आई.टी. कानपुर के द्वारा 1995 में विकसित किया गया है. आगे चलकर हैदराबाद विश्वविद्यालय के 'सेंटर फॉर एप्लाइड लिंग्विस्टिक्स एंड ट्रांसलेशन स्टडीज' को यह हस्तांतरित कर दिया गया. इसमें तेलुगु, मराठी, बांग्ला, पंजाबी से हिंदी अनुवाद की सुविधा है.

अनुवादक :- दिल्ली की 'सुपरटेक सॉफ्टवेयर एंड हार्डवेयर प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी' ने अनुवादक नामक अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद सॉफ्टवेयर का विकास किया. यह सॉफ्टवेयर कंप्यूटर से अनुवाद करते समय हिंदी भाषा और उसके व्याकरणिक नियमों का यथासंभव पालन करता है. इसमें शब्दों की वर्तनी की जांच के लिए 'स्पेल चेकर' की सुविधा भी मौजूद है.

यूनिवर्सल नेट्वर्किंग लैंग्वेज (यू.एन.एल.) :- यह प्रणाली आई.आई.टी., मुंबई द्वारा अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद करने के लिए विकसित की गयी. इस प्रणाली का विकास कर हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया.

शिव और शक्ति मशीन अनुवाद प्रणाली :- इस अनुवाद प्रणाली का विकास हैदराबाद स्थित अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलौर स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के कार्नेगी मेनल विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयास से किया गया है. यह अनुवाद तंत्र तीन लक्ष्य भाषाओं हिंदी, मराठी और तेलुगु के लिए कार्य करता है. शक्ति भारतीय भाषाओँ में अनुवाद की तीव्रता के लिए तैयार किया गया है.

तमिल-हिंदी कंप्यूटर सहायक अनुवाद प्रणाली :- तमिलनाडु के चेन्नई स्थित अन्ना विश्वविद्यालय के बी.चंद्रशेखर अनुसन्धान केंद्र के द्वारा तमिल-हिंदी कंप्यूटर सहायक अनुवाद प्रणाली विकसित की गयी है. यह प्रणाली 'अनुसारक' पर आधारित है. इसमें आगत तमिल में और निर्गत हिंदी में उपलब्ध होता है.

श्रुतलेखन राजभाषा और वाचांतर राजभाषा प्रणाली:- यह वाणी पहचान सॉफ्टवेयर है जिसे वाक् से पाठ सॉफ्टवेयर भी कहते हैं. इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से कंप्यूटर उच्चारित की गयी सामग्री को मुद्रित पाठ के रूप में परिवर्तित कर देता है. हिंदी में वाक् से पाठ के लिए पुणे सी. डेक द्वारा इस सॉफ्टवेयर का विकास किया गया. आगे चलकर 'वाचान्तर राजभाषा' नामक सॉफ्टवेयर का विकास पुणे सी.डेक के 'एप्लायड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ग्रुप' ने किया. यह अंग्रेजी में बोले गये वाक्य को हिंदी पाठ के रूप में प्रस्तुत करने वाला प्रणाली है.

जिस्ट प्रणाली:- दक्षिण पूर्व एशियाई भाषाओं को एक साथ लाने के लिए आई.आई.टी. कानपुर ने जिस्ट प्रणाली का विकास किया. यह विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा में प्रयोग की जाने वाली शब्दावलियों के हिंदी अनुवाद के लिए तैयार की गयी है.

स्वर्णाकृति :- यह प्रणाली सी डेक नोएडा द्वारा अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के लिए विकसित की गयी है.

हिंग्लिश :- 2004 में इस प्रणाली को हिंदी प्रणाली आग्लभारती और अंग्रेजी-हिंदी प्रणाली अनुभारती में सुधार करने हेतु विकसित किया गया है. यह अंग्रेजी मिश्रित हिंदी भाषा के अनुवाद से सम्बन्धित है.

संपर्क :- भारतीय भाषाओँ के मध्य अनुवाद करने के उद्देश्य से इस प्रणाली का विकास 2009 में विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से किया गया. इसे विकसित करने में आई.आई.टी. हैदराबाद, इलाहाबाद, खड़गपुर, अन्ना विश्वविद्यालय, के.बी.सी. चेन्नई, सी-डेक नोएडा आदि ने सहयोग किया है.

      उपरोक्त के अतिरिक्त 2009 में हिंदी से पंजाबी अनुवाद प्रणाली का विकास पंजाब विश्वविद्यालय के द्वारा किया गया. कम्प्यूटर कंपनी आई.बी.एम. के द्वारा पी. सी. डॉस-7 का हिंदी संस्करण तैयार किया गया है. यह एक ऐसी प्रणाली है जिससे अंग्रेजी न जानने वाले भी कम्प्यूटर का प्रयोग कर सकते हैं. साथ ही एच.पी.सी.एल. के द्वारा सॉफ्टवेयर 'ड्रेगन नेचुरली स्पीकिंग' का विकास किया गया जिसके माध्यम से अंग्रेजी का भारतीय उच्चारण के अनुसार प्रयोग किया जा सकता है. साथ ही भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली योग के द्वारा अंग्रेजी-हिंदी 'वृहत प्रशासन शब्दावली' कोश भी तैयार किया गया है. 'गूगल ट्रांसलेट' इस दिशा में कारगर प्रयास है जिसके माध्यम से कई भाषाओँ में मिनटों में अनुवाद किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त 'लीला' नामक सॉफ्टवेयर भारतीय राजभाषा विभाग के द्वारा विकसित किया गया है जिसने कंप्यूटर पर हिंदी में काम करने को अत्यंत सरल बना दिया है.

3.कम्प्यूटर अनुवाद और हिंदी : उपयोगिता और समस्याएं

कंप्यूटर अनुवाद के उपयोगिता या सुविधाएँ :-

      अनुवाद एक सांस्कृतिक सेतु की तरह कार्य करता है. इसके माध्यम से विभिन्न भाषाओँ के लोग आसानी से परस्पर संवाद कर सकते हैं. डॉ रीतारानी पालीवाल अनुवाद के विषय में लिखती हैं, ''मानव के पास आयु, समय और साधन की एक सीमा रहती है. हर व्यक्ति संसार की हर भाषा नहीं सीख सकता. ऎसी स्तिथि में अनुवाद ही वह माध्यम है, जिसके द्वारा हम सभी भाषाओं से संपर्क स्थापित कर सकते हैं.'' उनका यह कथन कम्यूटर अनुवाद के सम्बन्ध में भी सार्थक है.

      कम्प्यूटर अनुवाद से हिंदी के क्षेत्र में व्यापक सुविधाएँ हुई हैं जैसे- सुधारात्मक उच्चारण पाठ तैयार किया जा सकता है, विभिन्न लेखकों की रचनाओं के अनूदित संस्करण की सॉफ्ट कॉपी तैयार की जा सकती है, हिंदी शिक्षण के अंतर्गत लिपि एवं भाषा शिक्षण, वाक्यविन्यास, उच्चारण आदि के शिक्षण में सहायक, पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन बनाने में भी सहायक हो सकता है. साथ ही कोश निर्माण, भाषा शिक्षण,शीघ्र, शुद्ध और वैज्ञानिक अनुवाद में भी सहयोगी है. कंप्यूटर अनुवाद जहाँ एक तरफ सूचना संचयन में सहायक है वहीं दूसरी ओर वाक् और पाठ प्रणाली सामग्री के टंकण से भी मुक्त करती है. केवल बोलकर ही सामग्री का संकलन किया जा सकता है. कार्यालयी भाषा, वैज्ञानिक, तकनीकी, बैंकिंग आदि की भाषा के अनुवाद में सक्षम है.

      उपरोक्त के अतिरिक्त कंप्यूटर अनुवाद नेत्रहीनों के लिए ब्रेल का हिंदी में प्रिंट उपलब्ध करवा सकता है, साथ ही पाठ से वाक् प्रणाली के सहयोग से नेत्रहीन व्यक्ति टंकित सामग्री को सुन सकते हैं. साथ ही, भाषा के ध्वन्यात्मक, रूपात्मक, शब्द्परक विश्लेषण और शब्दशः अनुवाद में कंप्यूटर अनुवाद व्यापक सहयोग कर सकता है. यह भाषिक लिप्यान्तरण में भी सहायक है. यह वर्तनी की जाँच में भी सहायक है. इस प्रकार यह समय की बचत के साथ-साथ अनुवाद कार्य स्तरीयता को भी बनाये रखने में सहयोगी है. ऑनलाइन के अतिरिक्त ऑफलाइन अनुवाद के मशीन अनुवादक उपलब्ध है जो इंटरनेट की अतिरिक्त मांग नहीं करते जिससे धन की भी बचत होती है.

कंप्यूटर अनुवाद में आने वाली समस्याएं (हिंदी भाषा के सन्दर्भ में) :-

      कंप्यूटर अनुवाद का प्रारंभ यूरोपीय देशों में हुआ. इसकी वजह से कंप्यूटर की समस्त कार्य प्रणाली रोमन भाषा पर आधारित है. रोमन भाषा पर आधारित होने के कारण अन्य भाषाओँ के लिए कंप्यूटर अनुवाद प्रणाली को विकसित करना काफी जटिल रहा है और अभी भी इस दिशा में अनुवाद करते समय कई समस्याओं का सामना करता पड़ता है, जैसे - प्राकृतिक भाषा की द्विअर्थाकता, गूढ़ अर्थ या भावानुवाद का अनुवाद करने में असक्षमता, कंप्यूटर को भाषा का सम्पूर्ण ज्ञान देने में समस्या, भाषिक विश्लेषण की समस्या, उच्च स्तरीय द्विभाषी कोशों की अनुपलब्धता, सही अनुवाद पर्याय चयन की समस्या, भाषाओँ सजातीय और विजातीय के व्याकरणिक वैविध्य की समस्या, कहावतों और लोकोक्तियों के अनुवाद तथा काव्यानुवाद की समस्या, भाषाओं में उच्चारण की विविधता की समस्या.

उदहारण :-

      एक ही शब्द के कई अर्थ होने की दिशा में कंप्यूटर अनुवाद सही साबित नहीं होता-

अंग्रेजी में well दो अर्थों में इस्तेमाल किया जाता है- कुआं, अच्छा. हिंदी में इसका अनुवाद करते समय सन्दर्भ का ध्यान रखना होता है. किन्तु यह कम कम्यूटर नहीं कर पाता. इसके लिए कम्प्यूटर को या तो निर्देशित करना पड़ता है या फिर वह कुछ इस तरह से अनुवाद कर देता है-

Ram is well.

राम कुआँ है.

या

Well is there.

अच्छा वहाँ है.

मशीन अनुवाद के क्षेत्र में अब तक किये गये अध्ययन से यह ज्ञात होता है कि मशीन अनुवाद पूर्णतः शुद्ध अनुवाद करने में असक्षम है. अधिकतम शुद्धता 80से 90 प्रतिशत ही है, वह भी यह सभी प्रणालियों में नहीं है. कहीं-कहीं तो केवल 60 प्रतिशत ही शुद्धता प्राप्त होती है.

 

3.उपसंहार

      विचारक जे. डब्ल्यू. गेटे ने कहा है, ''अनुवाद की अपूर्णता के सम्बन्ध में कोई चाहे जो भी कहे परन्तु अनुवाद विश्व के सभी कार्यों से अधिक महत्वपूर्ण और महानतम कार्य है.'' गेटे का यह कथन कंप्यूटर अनुवाद के सम्बन्ध में भी सार्थक है. उपरोक्त विश्लेष्ण यह सिद्ध करता है कि कंप्यूटर अनुवाद ने हिंदी के साथ-साथ सभी भाषाओं के लिए अपने क्षेत्र के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया है. इसने हिंदी को अन्य भाषाओं के दायरे के पार पहुंचा दिया है और एक सांस्कृतिक सामंजस्य का माहौल बना दिया है. वास्तव में कंप्यूटर अनुवाद हिंदी के लिए एक ऐसी युक्ति साबित हुई है जिससे हिंदी भाषा, साहित्य और हिंदी भाषी समाज के दायरे का विस्तार होगा.

वर्चुअल रियेलिटी की दुनिया में घर बैठकर कंप्यूटर अनुवाद करना तो संभव हुआ है किन्तु इस दिशा में किये गये प्रयासों में अभी पर्याप्त कमियाँ और त्रुटियाँ मौजूद हैं. भाषाविदों और वैज्ञानिकों के प्रयास निरंतर जारी हैं. इन प्रयासों से यह आशा की जा सकती है कि वह समय जल्द ही आयेगा जब कंप्यूटर या किसी भी तकनीक के सन्दर्भ में भाषा कोई सीमा नहीं रह जायेगी. कंप्यूटर अनुवाद के माध्यम से किसी भी भाषा का व्यक्ति पल भर में भाषा की सीमा को पार कर जाएगा. इसके लिए और अधिक अनुसन्धान और त्रुटिरहित प्रणालियों को विकसित किये जाने की आवश्यकता है.  

सन्दर्भ सूची

पुस्तकें :-

  • डॉ. हरीश कुमार सेठी. (2009). ई-अनुवाद और हिंदी. दिल्ली : किताबघर प्रकाशन.
  • डॉ. आरिफ नजीर. (2005). हिंदी में अनुवाद की भूमिका और द्विभाषी कम्प्यूटरीकरण. दिल्ली : अनंग प्रकाशन.
  • एन.ई.विश्वनाथ अय्यर. (1992). अनुवाद भाषाएँ एवं समस्याएं. दिल्ली : ज्ञानगंगा प्रकाशन.
  • डॉ. सुरेश कुमार. (1986). अनुवाद सिद्धांत की रूपरेखा. नई दिल्ली : वाणी प्रकाशन.
  • राजमल बोरा. (2004). अनुवाद क्या है. नयी दिल्ली : वाणी प्रकाशन.
  • गरिमा श्रीवास्तव. (2003). आशु अनुवाद. नई दिल्ली : संजय प्रकाशन.
  • डॉ. आरिफ नजीर. (2005). हिंदी में अनुवाद की भूमिका और द्विभाषी कम्प्यूटरीकरण. नई दिल्ली : अनंग प्रकाशन.
  • कुसुम अग्रवाल.(2008). अनुवाद शिल्प : समकालीन संकल्प. नई दिल्ली : साहित्य सहकार.
  • रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव, डॉ. कृष्ण कुमार गोस्वामी. (1995). अनुवाद सिद्धांत एवं समस्याएं. दिल्ली : आलेख प्रकाशन.
  • रीतारानी पालीवाल.(2004). अनुवाद प्रक्रिया और परिदृश्य. नई दिल्ली : वाणी प्रकाशन.
  • भोलानाथ तिवारी. (2009). अनुवाद विज्ञान, सिद्धांत एवं प्रविधि. नई दिल्ली : किताबघर प्रकाशन.
  • गोपीनाथन. (2001). अनुवाद सिद्धांत एवं प्रयोग. नई दिल्ली : लोकभारती प्रकाशन.

 

  अंतर्जालिक स्त्रोत :-

  • यांत्रिक अनुवाद. 22 फ़रवरी 2015. https://hi.wikipedia.org/wiki/यांत्रिक _अनुवाद से 6/8/16 को पुनः प्राप्त.
  • मशीन अनुवाद और उसकी समस्याएं. 5 मार्च 2016. http://freelanctranslators .blogspot.in/2016/03/blog-post.html से 6/8/16 को पुनः प्राप्त.
  • राहुल एन.म्ह्येस्कर. मशीनी अनुवाद की समस्याएं. 20 अगस्त 2009. prayaslt.com/2009/08/blog-post_5034.html से 6/8/16 को पुनः प्राप्त.
  • 22 july 2016, https://en.wikipedia.org/wiki/Translation से 8/8/16 को पुनः प्राप्त.

पत्रिका :

  • ब्रिजेश भट्ट जटायु, कृति पटेल. (जुलाई 2013-दिसम्बर 2013). Resource Development For English To Gujrati Machine Translation. विश्वभारत@tdil, अंक-41, 0972-6554.
  • कृष्ण कुमार गोस्वामी. (2013). मशीनीकरण से कम्प्यूटरीकरण. हिंदी टेक - भाषा प्रौद्योगिकी, 2231-4989.