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पिंकी कुमारी बागमार की कविता

 

औरत

कराया गया मुझे अछूत होने का अहसास

जब कहा गया मुझसे तू ..तू तो है एक औरत जात

पैदा तो हुई थी बस मैं एक औरत के रूप में

पर कर दिया इस समाज ने मुझे रुढिवादिता में जब्त

और बना दी मेरी औरत जात।

आगे पढना है मुझे ..आगे बढ़ना है मुझे

पर हर कदम पे रोकना चाहता है मुझे ये समाज

कहता है क्या करेगी आगे पढ़ कर

तू..तू तो है एक औरत जात।

 

रिश्ते की बात छिड़ी जब मेरी

कई लड़के मुझे देखने आए

किसी ने मुझे न पसंद किया

 तो किसी ने मेरी संपत्ति को पसंद किया

बिहा दी गई मैं उसके साथ

मेरी पसंद की नहीं थी कोई बिसात

क्यों ? क्योंकि बना दिया इस समाज ने मुझे बस एक औरत जात।

लुटती है जब आबरू मेरी,शर्मिंदा भी होती मैं

ताने भी सुनती मैं,और बंदिशों में बाँध दी जाती मैं

और खुले आम घूमता है मेरी इज्जत को तार-तार करने वाला वो हैवान

देने की जगह गुनहेगार को सजा

देश के नेता सिखाने लगते हैं औरत को कपड़े पहनने का सलीका

क्यों? क्योंकि वह है पुरुष और  मैं हूँ एक औरत जात ?

 

 

 

 

पैदा होते ही माँ-पिता के हिसाब से जिन्दगी जी मैने

ये खाओ,ये पहनो,ऐसे मत चलो ,ऐसे मत बात करो ,ऐसे मत हंसो,

बड़ी होते ही भाई के हिसाब से जिन्दगी जी

वहाँ मत जाना ,ऐसे कपड़े मत पहनना ,ज्यादा किसी से बात न करना

शादी हुई तो पति के हिसाब से जिन्दगी जी मैने

उनकी इच्छाओं में खुद को ढाल ली मैं

पर इन सबकी जिन्दगी जीते-जीते खुद को खो दी मैं

क्यों ? क्योंकि समाज की नज़रों में मैं हूँ बस एक औरत जात।

 

आखिर कब तक औरत को ‘औरत जात’ नाम की बेड़ियों में बाँध के रखेगा ये समाज

आखिर कब तक औरतो के सपनों को कुचलते रहगा परम्पराओं के नाम पर ये समाज

आखिर कब औरत के अस्तित्व को समझेगा ये समाज ?

कब इस पुरुष प्रधान समाज के समझ में आएगी समानता की बात ?

कब समझेगा ये समाज की स्त्री पुरुष दोनों के अधिकार है समान

कब? आखिर कब?

नहीं बंधना औरत जात की बेड़ियों में मुझे

मैं बस एक औरत हूँ ...सबकी तरह एक आम इंसान

मुझे औरत ही रहने दो ...मत बनाओं मुझे खुद से अलग कर मेरी कोई जात

 

 

पिंकी कुमारी बागमार (एम.ए ,बी.एड )

केशरीपुत्र भवन ,म.न-453/376 .वार्ड-9,मलिंचा रोड ,खडगपुर

पिन-721301 ,जिला-पश्चिम मेदिनीपुर,फ़ोन-9475004249 ईमेल pinkibaghmar@gmail.com