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जनकृति का नवीन अंक [21वीं सदी विशेषांक] आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है. अंक की पीडीऍफ़ कॉपी आप विषय सूची के ऊपर दिए लिंक से प्राप्त कर सकते हैं.

हाइकु: आमिर सिद्दीकी

बादल के टुकड़े

हंसते और चल देते हैं

डेमो के ऊपर

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बिल्ली का बच्चा

मेरे बच्चे की बोतल

तकता रहता है

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चावल दम पर थे

स्टेशन पर खुशबू थी

कांधों पर ताबूत

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लकड़ी से पिटकर

तोता हाल बताता है

अच्छी किस्मत का

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सूखी मछली थी

एक थाली भात भरी थी

जमुना गुस्से में

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सूखे जोहड़ में

अपने बच्चों की लाशें

मेंढक का नोहा

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खिड़की के ऊपर

जाने कितने वर्षों से

जाले मकड़ी के

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चक चक चक चक चक

उजली गाड़ी चलती है

मेरी पटरी पर

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कबसे संवरी हैं

जाना कमरे में तेरी

यादें बिखरी हैं

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यह बूढ़े चेहरे

सदियां छाने बैठे हैं

कितने गहरे हैं

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बासी फूलों का

हाथों में है गुलदस्ता

ताजे नोटों का

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उलझे बालों की

यादें अब तक दिल में है

गोरे गालों की

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पर्दा जुल्मत का

जाने कब से काट रहा है

मुर्गा बागों से

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कितना मुश्किल है

अम्मी इन बाजारों से

गुजरना मुश्किल है

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बिजली कड़की है

मां मुझको डर लगता है

गोदी में ले लो

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मुर्गा भी बोला

मेरे या तेरे बच्चे

दोनों भूखे हैं

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रेशम का कीड़ा

मर कर भी दे जाता है

जिंदो को कपड़ा

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चाचा चाची में

झगड़े ऐसे होते हैं

जैसे बच्चे हैं