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हाइकु: आनन्द बाला शर्मा

हो नववर्ष 

सुन्दर सुखमय

मंगलमय 

 

हो समर्पण 

मातृभूमि के लिए 

प्राणपण से

 

ढो रहे बच्चे 

आकांक्षाओं का बोझ 

बस्ते के साथ

 

पत्ते  ही नहीं 

रिश्ते भी सूखते हैं

पतझड़ में

 

धुंध के बीच 

सहमा सहमा सा

जनजीवन

 

नैन हमारे 

बुन रहे सपने

बिन झपके

 

 

सोखे कलम

ब्लाटिंग पेपर सी

दर्द की स्याही 

 

दीप आस्था का

तुफानों के बीच भी 

रहा जलता

 

धुआँ चुल्हे का

हो या हो चिमनी का

घुटती सांसें

 

कलम चाहे

संवेदना की स्याही 

सर्वहित में

 

आनन्द बाला शर्मा

9709013288