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जनकृति का जनवरी 2018 (अंक 33) आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है। अंक में प्रकाशित सामग्री आप विषय सूची के अनुरूप बायीं ओर विविध स्तम्भ में पढ़ सकते हैं। फरवरी अंक हेतु रचनाएँ, शोध आलेख भेजने की अंतिम तिथि 10 फरवरी है।

वो तुम्हारे साथ नहीं आएगी: भारत दोसी [कहानी]

वो तुम्हारे साथ नहीं आएगी

   -भारत दोसी


   

 ‘मैं किशोरावस्था से ही ऐसा रहा हूँ लडकियों के साथ बैठना, बातें करना, हंसी-मजाक, छू लेना.... मुझे पसन्द रहा है लेकिन पिछले दिनों एक महिला मिली लम्बा रिश्ता चला कभी छुआ नहीं.... लेकिन उसकी दूरी मुझे हिला गई ।’

     मैं अपने चेम्बर में बैठा था वह 50 साल से उपर का व्यक्ति था लगता नहीं था पर था और मेरे पास काउन्सलिंग के लिए आया था मैं ने उसे रोका । शुरू से पूरी बात बताने के लिए कहा । उसने बताया -

       ‘वह अपने जॉब के लिए रोजाना बस से आता-जाता है । एक दिन 30-32 साल की युवती, गोरा रंग, लम्बे बाल, आंखो मे सम्मोहन लिए मेरे पास की सीट पर बैठ गई । औपचारिक बातें हुई अच्छी लगी, पसन्द आई तो मैं उसके लिए रोजाना अपने पास की सीट रोकने लगा । हर विषय पर वह बेबाकी से विचार रखती । बिंदास थी कही कोई ग्रंथी नहीं थी । उन्मुक्त हंसी थी मेरे जैसे का आकर्षित हाना स्वाभाविक था ।’

         ‘कई बार बस पकडने मे मुझे देर हो जाती तो वह सीट रोके मिलती यदी दो की सीट पहले से भरी होती तो वह मुझे थोडी जगह देकर बैठा देती । मैंने मोबाईल से उसके कई फोटो लिए वह देखती और हंस देती कभी मना नहीं किया । स्वाभाविक रूप से मैं उसके परिवार के बारे मे वह मेरे परिवार के बारे मे जानने लगे थे । वह अपनी पारवारिक समस्या, घटना, बातें तक मुझसे बताने लगी थी । मैं उससे प्यार की बातें भी करने लगा मेरे जीवन मे आई लडकियों की बातें भी बताने लगा उसने अपने जीवन की घटनाएं तो नहीं बताई लेकिन उसके साथ रही लडकियों के जीवने की प्रेम कथाएं जरूर बताई । रोजाना का आधे घंटे का सफर बहुत ही सुहावना था दिन भर इस सफर का इंतजार रहने लगा था ।’

   ‘अब यह होने लगा था की उसका बस किराया भी मैं ही देता । उसके नहीं आने पर बए छोड भी देता दूसरी बस मे जाते । उसने कभी इंकार नही किया की उसका बस किराया ना दूं या उसने कभी मेरा बस किराया नहीं दिया ।’

    ’कभी-कभी मैं उसे स्टार, केडबरी की चाकलेट देने लगा । कभी उसने थेंक्स नही किया । बैग मे रख लेती । एक दिन मजाक -मजाक मे कहा भी उसने ’मैं फंसने वाली नहीं हूँ ।’ मैं नही जानता की फंसाना चाहता था या नहीं इसलिए मुझे बुरा भी नहीं लगा लेकिन जिस दिन वह बस मे नहीं मिलती तो मैं उसे कॉल करता वह जवाब देती बाद में बोली की ’मुझे घर पर कॉल मत किया करो ।’

      और एक दिन वह बस में चढी मेरी तरफ देखा भी नहीं और दुसरी सीट पर बैठ गई जहां मुझसे कम उम्र मका 40-42 का युवक बैठा था । वे दोनों बातें करने लगे मुझे बहुत बुरा लगा । पता नहीं क्यूं ? मैंने उसे कॉल किया उसने नहीं उठाया यहा तक की मेरी तरफ देखा भी नहीं । उस युवक ने उसका किराया दिया, उसे केडबरी दी..... मैं देखता रहा । मैनंे बात करने की कौशिश की तो बोली ’मैं उसके साथ आना जाना करूंगी ।’ दूध से मक्खी की तरह उसने मुझे निकाल दिया मैं दुखी हूं नींद गायब है बुरा लगा है बहुत बुरा लगा है ।’

      ’दुसरे दिना मैंने फिर कोशिश की तभी एक आवाज आई’ अब वो तुम्हारे साथ नहीं आएगी ।’ हमारे साथ ही सफर करने वाली एक प्रोढा ने कहा ।’

  अब वह रूका और मुझसे पुछा ’क्या करू?’ मैंने उसे कहा ’कल आना फिर बात करते है ।’ पर सोच रहा हूँ क्या सलाह दूँ? यह बात मेरे समझ मे आ गई की यह प्रोढ भावुक है इसका भी उस महिला से आकर्षण है ।

         दुसरे दिन मैंने उस प्रोढ से कहा ’ लडकी को समझाओ, लडके के बारे मे बताओ ,बदनामी का डर बताओ और अगर तुम्हारी बात नहीं माने तो दूरी बना लो ।’ प्रोढ हंस दिया चला गया बहुत दिन हो गए है वह वापस मेरे पास आया नहीं है । ’

 

 

-भारत दोसी, 58/5,मोहन कॉलोनी बांसवाडा राज मो 9799467007